कश्मीर में पली बढ़ी हूं, इसलिए इतने गंभीर मुद्दों पर फिल्म बनाती हूं। यह कहना है डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर इफ्फत फातिमा का।
वह अपनी दो फिल्मों के प्रदर्शन के लिए चंडीगढ़ के आर्ट गैलरी एंड म्यूजियम पहुंची। चंडीगढ़ क्रिएटिव सिनेमा सर्किल और संगीत नाटक कला अकादमी चंडीगढ़ द्वारा आयोजित डॉक्यूमेंट्री फिल्म फेस्टिवल में इफ्फत की दो फिल्म द केसर राग और वेयर हेव यू हिडन माए न्यू मून क्रिशेंट प्रदर्शित की गई।
इफ्फत ने बताया कि दिल्ली के जामिया मिलिया से मासकॉम करने के बाद श्रीलंका में अपनी फेलोशिप प्रोग्राम के तहत डॉक्यूमेंट्री बनाने पहुंची। वहां जाकर लगा की लोगों की जिंदगी बहुत मुश्किल है।
उनकी जिंदगी में सेना की वजह से आए फर्क को लेकर 2005 में फिल्म लंका बनाई। इसको बनाते समय उन्हें ख्याल आया कि कश्मीर में भी इसी तरह की परेशानियां है। वहां लोग बच्चों को अपनी आंखों के सामने गिरफ्तार होते दिखे, लेकिन फिर उन्हें कभी वापस नहीं देख पाए।
फातिमा ने कहा कि कश्मीर में जिंदगी बहुत मुश्किल है और इसकी मुख्य वजह है वहा लागू स्पेशल एक्ट। आजकल फातिमा इसी प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं। उन्होंने बताया द केसर राग फिल्म लद्दाख की एक लोक कहानी पर आधारित है, जिसमें एक स्वर्ग का राजा दोबारा जिंदा हो जाता है और इस तरह से केसर राग का जन्म होता है।
इफ्फत की दूसरी फिल्म वेयर हेव यू हिडन माए न्यू मून क्रिशेंट में कश्मीर की एक औरत की कहानी दिखाई, जिसका नाम मुगली है। मुगली कश्मीर में रहने वाली एक कवयित्री है, जिसके बेटे को कुछ लोग उठा ले गए थे। उसके इंतजार में मुगली की कहानी थी, जो अंत में बस इंतजार में ही चल बसी।