पीजीआई की न्यू इमरजेंसी के ओटी कांप्लेक्स की लाइटों को साल 2013 में ही कंडम घोषित कर दिया गया था, लेकिन उन्हें बदला नहीं गया। कंडम लाइटों की रोशनी में आपरेशन होते रहे।
बुधवार शाम तकनीकी खराबी की वजह से ओटी नंबर छह की लाइट बंद हो गई। वीरवार सुबह न्यूरो के एक पेशेंट का शंट प्रोसिजर करना था। डाक्टरों को लाइटों के बारे में पता नहीं था। जब पेशेंट ओटी टेबल पर आ गया तो डाक्टरों को पता चला कि आपरेशन थियेटर की लाइटें खराब हैं। पेशेंट इमरजेंसी में आया था, इसलिए डाक्टरों ने टार्च की रोशनी में आपरेशन करने का फैसला लिया।
इसके बाद एक टार्च का इंतजाम किया गया और फिर करीब सवा घंटे में मरीज में शंट ट्यूब डाला गया। शंट ट्यूब दिमाग के पानी का प्रेशर कम करने के लिए डाला जाता है। इसमें दिमाग से सीधे पेट में एक पाइप डाली जाती है।
इससे प्रेशर रिलीज होता और पेशेंट को आराम मिलता है। आपरेशन के बाद पेशेंट को वापस भेज दिया जाता है। इस आपरेशन के बाद डाक्टरों ने किसी भी पेशेंट को ओटी में नहीं बुलाया। इस दौरान इस बात को लेकर बहस भी हुई थी कि जब पता है कि लाइट बंद है तो पेशेंट को क्यों लिया गया।
बंद कर दी गई ओटी
इसके बाद ओटी नंबर छह में कोई आपरेशन नहीं किया गया। हालांकि बाकी ओटी में आपरेशन होते रहे। बाद में पीजीआई के कर्मचारी आए और जुगाड़ करके चले गए। ओटी नंबर छह में विशेष तौर पर शंट के केस किए जाते हैं। ओटी में शार्ट सर्किट आम बात हो चुकी है। इससे पहले भी कई बार ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन पीजीआई प्रशासन ने लाइटों को नहीं बदला।
ओटी नंबर सात की भी लाइट खराब
ओटी नंबर सात की भी लाइट खराब है। बुधवार शाम से उसमें कोई भी केस नहीं लिया गया। इस ओटी में प्लास्टिक और डेंटल के केस लिए जाते हैं। इसमें लाइट दिल्ली की कंपनी की लगी है। दिल्ली से जब इंजीनियर आएगा, तभी उसकी लाइट ठीक हो पाएगी।
पीजीआई की न्यू इमरजेंसी की लाइटें काफी खराब हालत में हैं। सात ओटी हैं। इनमें से आधी लाइटे जलती हैं और आधी नहीं। कई बार डाक्टरों ने भी लिखकर दिया, लेकिन अब तक नई लाइटें नहीं लगाई गईं।
मंजू वडवलकर, प्रवक्ता पीजीआई ने बताया कि इस घटना के बारे में पता नहीं चल पाया। खराब लाइटों को जल्द ठीक कर दिया जाएगा।