पीजीआई में खाली पड़ा आवास।
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आवास होने के बावजूद भत्ता देकर करा रहा आर्थिक क्षति
एक तरफ संस्थान के 225 आवास खाली पड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ पीजीआई प्रशासन अपने कर्मचारियों को प्रतिमाह लगभग 15 लाख रुपये आवास भत्ता दे रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि आवास अलॉट न कर अधिकारी मनमानी करने के साथ ही सरकार की आर्थिक क्षति भी करवा रहे हैं।
अलग-अलग श्रेणी में इतना दिया जा रहा आवास भत्ता
- श्रेणी देय भत्ता
- टाइप 6 9500 रुपये
- टाइप 7 8700, 8900 रुपये
- टाइप 8 7600 रुपये
- टाइप 9 5400 से 6600 रुपये
- टाइप 10 4600 से 4800 रुपये
- टाइप 11 4200 रुपये
- टाइप 12 2000, 2400 व 2800 रुपये
- टाइप 13 1900 रुपये
- टाइप 14 1300 से 1800 रुपये
पीजीआई के आवासों की संख्या काफी कम है। जो हैं उनमें से ज्यादातर की स्थिति खराब है। समय-समय पर उसकी मरम्मत होती रहनी चाहिए। जहां तक आवास अलॉट करने में विलंब की बात है तो इस समस्या के समाधान के लिए एसोसिएशन पीजीआई के निदेशक से मिलकर आग्रह कर चुका है। उम्मीद है जल्द ही स्थिति में सुधार होगा। - प्रो. जेएस ठाकुर, अध्यक्ष पीजीआई फैकेल्टी एसोसिएशन।
आवास अलॉटमेंट में की जा रही अनदेखी के संदर्भ में कर्मचारी संघ ने 30 जून को स्वास्थ्य मंत्री को शिकायत की है। इससे पहले 12 अक्तूबर 2021 को भी इसकी शिकायत की गई थी। इसके बाद एक नवंबर 2021 को 30 मकान अलॉट किए गए थे। पीजीआई प्रशासन की अनदेखी के कारण कर्मचारी आवास की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। कई गुना ज्यादा किराया देकर 20 से 25 किमी दूर रहने को मजबूर हैं। - अश्वनी कुमार मुंजाल, महासचिव, पीजीआई कर्मचारी संघ (गैर संकाय)
संपदा और इंजीनियरिंग ब्रांच के संबंधित अधिकारियों से खाली आवास की डिटेल तथ्यों के साथ मांगी गई है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई निश्चित होगी। - कुमार गौरव, डीडीए व पीजीआई प्रवक्ता।