चंडीगढ़ में तेजी से बढ़ती भिखारियों की संख्या को देखते हुए कई संगठन मिल कर शहर में ‘भीख मत दो अभियान’ शुरू करने वाले हैं। इनमें रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन्स और व्यापारिक संगठन भी शामिल हैं।
व्यापार मंडल के अध्यक्ष चरणजीव सिंह का कहना है कि पूरे मार्केट की एसोसिएशनों को जल्द ही भिखारियों को भीख न देने का सरकुलर भेज दिया जाएगा।
व्यापारी भीख न देकर ऐसे लोगों को अपनी दुकान में नौकरी दें तो यह अच्छा उदाहरण होगा। फासवेक के अध्यक्ष पीसी सांघी के अनुसार इस समय लाइटों पर भिखारी चालकों को खूब परेशान कर रहे हैं। जब शहरवासी भीख देना ही बंद कर देंगे तो अपने आप ही भिखारी शहर से कम हो जाएंगे।
दूसरी ओर पुलिस अधिकारियों के अनुसार चंडीगढ़ में हरियाणा का बैगर एक्ट लागू था। इसे हरियाणा सरकार ने ही खारिज कर दिया।
ऐसी स्थिति में अब चंडीगढ़ पुलिस भी भिखारियों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकती। एसएसपी नौनिहाल सिंह के अनुसार हरियाणा द्वारा खारिज करने के बाद चंडीगढ़ से भी बैगर एक्ट समाप्त हो गया है।
अब कानूनी राय ली जा रही है कि किस तरह से भिखारियों पर लगाम लगाई जाए। जल्द ही कोई न कोई हल निकाल लिया जाएगा।
मार्केट एसोसिएशन, 20 सी के उपाध्यक्ष राकेश सूद ने कहा कि हमने सेक्टर-20सी की मार्केट में भिखारियों को भीख न देने का निर्णय लिया है।
हमारे सेक्टर में तीन प्रमुख मंदिर हैं, इसलिए भिखारियों की संख्या भी काफी ज्यादा है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को भी भीख न देने के लिए जागरूक किया जाएगा।
सेक्टर-23 बूथ मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश शर्मा ने कहा कि सेक्टर-23 सी की बूथ मार्केट में हमेशा भिखारियों का दल डेरा डाले रहता है।
सभी दुकानदारों से कह दिया गया है कि वे भिखारियों को भीख न दें और ग्राहकों को भी इसके लिए जागरूक किया जा रहा है।
राधाकृष्ण मंदिर के अध्यक्ष सुनील चोपड़ा के बताया कि जो युवक-युवतियां भीख मांगती हैं उन्हें भीख न देकर रोजगार देने का प्रयास किया जाएगा।