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26 साल पहले दुष्कर्म: आरोपी और पीड़िता के बेटे का डीएनए नहीं हुआ मैच, कोर्ट ने कहा-अब कोई सबूत नहीं

Tue, 26 Sep 2023 02:26 PM IST
निवेदिता वर्मा परीक्षित सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़

सार

महिला ने चंडीगढ़ पुलिस को 2019 में शिकायत देते हुए बताया था कि आरोपी 1996 से उसके घर आता था और 1997 में उसने शिकायतकर्ता से दुष्कर्म किया। इसके बाद वह गायब हो गया। अचानक एक दिन वह उसे चंडीगढ़ जिला अदालत में दिखाई दिया। इसी शिकायत को आधार बनाते हुए पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच आरंभ कर दी। 
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dna test - फोटो : social media
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विस्तार
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26 साल पहले हुए दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी और पीड़िता के बेटे की डीएनए रिपोर्ट मैच नहीं हुई है, जिसके चलते चंडीगढ़ की जिला अदालत ने पुलिस की कैंसिलेशन रिपोर्ट स्वीकार कर ली है। अपनी तरह के इस अलग मामले में आरोपी और पीड़िता के बेटे की डीएनए रिपोर्ट ही अहम सबूत थी, जो यह साबित कर सकती थी कि पीड़िता के साथ उक्त व्यक्ति ने ही दुष्कर्म किया है। 
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मामले में व्यक्ति आरोप लगने के बाद गायब हो गया था, जिसे पीड़िता ने 22 साल बाद पहचानते हुए 2019 में केस दर्ज करवाया। वहीं, केस उस वक्त उल्टा पड़ गया जब डीएनए रिपोर्ट निगेटिव आ गई। इसके बाद पुलिस की ओर से केस की कैंसिलेशन रिपोर्ट को अदालत ने स्वीकार करते हुए कहा कि जब पीड़िता के बेटे का डीएनए आरोपी से मेल ही नहीं खाता है तो दुष्कर्म का मामला नहीं बनता है।

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1997 में दुष्कर्म करने का था आरोप
जानकारी के अनुसार महिला ने चंडीगढ़ पुलिस को 2019 में शिकायत देते हुए बताया था कि आरोपी 1996 से उसके घर आता था और 1997 में उसने शिकायतकर्ता से दुष्कर्म किया। इसके बाद वह गायब हो गया। अचानक एक दिन वह उसे चंडीगढ़ जिला अदालत में दिखाई दिया। शिकायत को आधार बनाते हुए पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच आरंभ कर दी। 

इस दौरान पीड़िता ने अपने बच्चे का डीएनए आरोपी से मिलान करवाने के लिए टेस्ट का आदेश जारी करने की अपील की। जिला अदालत ने केस की परिस्थितियों को देखते हुए कहा कि दुष्कर्म साबित करने के लिए यह डीएनए टेस्ट बेहद अहम है क्योंकि अपराध 1997 में हुआ था। अदालत के आदेश पर डीएनए परीक्षण करवाया गया और इसमें शिकायतकर्ता के बेटे का डीएनए आरोपी से मैच नहीं हुआ। 
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अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के पास केवल यही जरिया था जिससे वह आरोप को साबित कर सकती थी। पुलिस ने इस रिपोर्ट को आधार बनाते हुए जिला अदालत में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल की थी। इस रिपोर्ट को मंजूर करते हुए अदालत ने मामले का निपटारा कर दिया। अदालत ने कहा कि जब आरोपी बच्चे का पिता ही नहीं है तो दुष्कर्म का मामला नहीं बनता है।
 
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