समय पर प्लॉट का पजेशन न देने पर उपभोक्ता आयोग ने डीएलएफ यूनिवर्सल लिमिटेड को सेवा में कोताही का दोषी करार दिया है। आयोग ने डीएलएफ को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 92 लाख 95 हजार 561 रुपये वापस करे। सेवा में कोताही और मानसिक प्रताड़ना के लिए तीन लाख मुआवजा और 50 हजार रुपये मुकदमा खर्च अदा करे। आयोग ने वापस की जानेवाली राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज देने का भी निर्देश दिया है।
आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के अंदर निर्देश का पालन न करने पर 15 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज अदा करना होगा। यह निर्देश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंडीगढ़ के अध्यक्ष जस्टिस (रिटायर्ड) जसबीर सिंह, सदस्य देवराज और पदमा पांडेय ने दिया है।
शिकायतकर्ता आदित्य शर्मा निवासी सेक्टर-22सी चंडीगढ़ ने गुड़गांव स्थित डीएलएफ यूनिवर्सल लिमिटेड और चंडीगढ़ आईटी पार्क स्थित डीएलएफ यूनिवर्सल लिमिटेड के खिलाफ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम में शिकायत दी थी। शर्मा ने शिकायत में कहा कि उन्होंने डीएलएफ यूनिवर्सल लिमिटेड के मुल्लांपुर स्थित न्यू चंडीगढ़ में प्रोजेक्ट ‘हाईड पार्क एस्टेट’ में प्लॉट के लिए 29 मई, 2013 को 92 लाख 95 हजार 561 रुपये अदा किए।
वह प्लॉट दूसरे के नाम पर था। प्लॉट शिकायतकर्ता के नाम पर ट्रांसफर हो गया, लेकिन राशि जमा होने के दो वर्ष के अंदर प्लॉट का पजेशन देना था, जो डीएलएफ की ओर से नहीं दिया गया। शिकायतकर्ता ने साइट पर जाकर देखा तो वहां पर विकास के काम नहीं हो रहे थे। शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि 11 नवंबर, 2014 को डीएलएफ की ओर से पेपर पजेशन का ऑफर किया गया। इस संबंध में शिकायतकर्ता ने डीएलएफ के सामने बात रखी कि बिना किसी प्रकार के डेवलपमेंट वर्क और बुनियादी सुविधाओं के पेपर पजेशन का क्या अर्थ है।
इस पर डीएलएफ ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इस संबंध में शिकायतकर्ता ने डीएलएफ को कानूनी नोटिस भी भेजा और अंत में अपनी राशि वापस मांगी थी, जो नहीं दी गई। डीएलएफ यूनिवर्सल लिमिटेड ने उपभोक्ता आयोग में पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने सेवा में कोताही नहीं की है। एग्रीमेंट के अनुसार साइट पर बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। शिकायतकर्ता की ओर से समय पर किश्त जमा न कराने पर पजेशन में देरी हुई है।