पंजाब सरकार ने सतलुज यमुना लिंक नहर के लिए एक्वायर जमीन मालिकों को वापस देने के एलान को अमलीजामा पहनाने की तैयारी शुरू कर दी है। सोमवार को विधानसभा में द एसवाईएल कनाल (री-हैबिलिटेशन एंड री-वेस्टिंग ऑफ प्रोपराइटरी राइट्स) बिल-2016 पेश किया जाएगा।
शुक्रवार देर शाम सीएम प्रकाश सिंह बादलकी प्रधानगी में हुई कैबिनेट की अहम बैठक में इस बिल को पेश करने की मंजूरी दे दी गई। इसके जरिए एसवाईएल के लिए एक्वायर की गई जमीन व जायदाद के अधिकार दोबारा मालिकों या उनके वारिसों को दिए जाएंगे, जमीन का पुनर्वास किया जाएगा। वीरवार को सीएम प्रकाश सिंह बादल ने विधानसभा में कहा था कि न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी। जब जमीन ही नहीं रहेगी तो एसवाईएल कहां बनेगी।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि संबंधित राजस्व अथॉरिटी द्वारा जमीन के संबंध में मालिकाना हक में जरूरी संशोधन यकीनी बनाया जाएगा। कैबिनेट ने बिल के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है। जिसके तहत जमीन मालिकों या उनके वारिसों को जमीन के बदले प्राप्त किए गए सारे लाभ व मुआवजे की पूरी राशि साठ किस्तों में ब्याज समेत देनी होगी जोकि नोटिफिकेशन जारी करने की तारीख के छह माह की अंतिम तारीख से शुरू होंगी। ऐसा न करने पर इसकी वसूली राजस्व विभाग द्वारा जमीनी बकाये के रूप में की जाएगी। गौरतलब है कि बादल ने वीरवार को पंजाब के पानी के मुद्दे पर विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया था। इसमें कहा गया था कि पंजाब खेती प्रधान सूबा है और नदियां इसकी जिंदगी हैं।
पर इस मुद्दे पर पंजाब के साथ नाइंसाफी की गई है। रिपेरियन सिद्धांतों के मुताबिक पंजाब के पानी पर इसका हक बनता है। इसके बावजूद अलग-अलग समझौतों व फैसलों के जरिए पंजाब का हक मारा गया। पंजाब के पास किसी को देने के लिए एक बूंद पानी नहीं है। यह सदन सर्वसम्मति से संकल्प लेता है कि पंजाब के पानी पर बेइंसाफी वाला कोई फैसला मंजूर नहीं किया जाएगा। सभी पंजाबी व सियासी पार्टियां आपसी गुटबाजी से ऊपर उठ कर इस मुद्दे पर एकमत होकर पंजाबियों के हितों की रक्षा करेंगी। सत्ताधारियों ने विपक्ष की गैर मौजूदगी में यह प्रस्ताव पास किया था। इसके बाद सीएम बादल ने ऐलान किया कि एसवाईएल के निर्माण के लिए अधिग्रहीत जमीन मालिकों को वापस की जाएगी।
फिर दोहराया जाएगा इतिहास
सोमवार को विधानसभा में एक बार फिर इतिहास दोहराया जाएगा। 2004 में पंजाब का पानी बचाने के लिए तत्कालीन सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह टर्मिनेशन ऑफ रिवर्स वाटर एक्ट लाए थे। पंजाब के हितों के अलावा यह एक सियासी फैसला भी था। पर मजबूरी में विपक्ष में बैठे अकाली दल और भाजपा को इसका समर्थन करना पड़ा था। अब अकाली दल ने भी वैसा ही मास्टर स्ट्रोक खेला है। कांग्रेस को भी हर हाल में इसका समर्थन करना होगा।
हमने ही दिया आइडिया : कांग्रेस
कांग्रेस एसवाईएल के लिए एक्वायर जमीन मालिकों को वापस करने के मामले में खुद क्रेडिट ले रही है। पार्टी का कहना है कि अकाली दल ने पानी के मुद्दे पर जो प्रस्ताव तैयार किया था, उसमें इस बात का जिक्र ही नहीं था। लेकिन कांग्रेस ने इसके बदले संशोधित प्रस्ताव तैयार कर स्पीकर को दिया था, उसमें यह बात साफ लिखी थी। कांग्रेस ने ही यह आइडिया दिया था कि एसवाईएल की जमीन वापस मालिकों को दे दी जाए, ताकि नहर का विवाद हमेशा के लिए खत्म हो जाए। सीएलपी लीडर चरनजीत सिंह चन्नी ने शुक्रवार को विधानसभा में भी यह कहा।