गोवा के एक चर्च में 300 साल पुराना शव अभी तक रखा हुआ है। यह दलील दिव्य ज्योति जागृति संस्थान नूरमहल, जलंधर के वकील एडवोकेट आरएस राय ने हाईकोर्ट में दी।
वह डेरा प्रमुख आशुतोष महाराज का पोस्टमार्टम कराने और मौत का कारण पता लगाने के लिए दायर याचिका पर शुक्रवार को हो रही सुनवाई में डेरे की ओर से पेश हुए थे। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी है।
डॉक्टरों के मुताबिक आशुतोष महाराज मृत
याचिकाकर्ता पूर्ण सिंह ने हाईकोर्ट से कहा था कि शव अधिक देर तक नहीं रखा जा सकता। इसके विपरीत डेरे के पैरोकार मानते हैं कि आशुतोष महाराज समाधि में हैं।
इस मामले में पंजाब सरकार मान चुकी है कि डॉक्टरों की राय में आशुतोष महाराज मृत हैं। पूर्ण सिंह ने याचिका में आशंका जताई थी कि डेरे की संपत्ति हड़पने के लिए कुछ अनुयायी आशुतोष महाराज की हत्या कर सकते हैं।
उसने पोस्टमार्टम से मौत के कारणों का पता लगाने की मांग भी की थी। उल्लेखनीय है कि आशुतोष महाराज का शरीर 28 जनवरी रात पौने दो बजे से डेरे में रखा हुआ है। अनुयायियों का मानना है कि महाराज समाधि में हैं और कभी भी समाधि से बाहर आ सकते हैं।
कमेटी का हो चुका है गठन
अब डेरे की ओर से कहा गया है कि संपत्ति की देखरेख के लिए बकायदा कमेटी गठित की जा चुकी है। यह कमेटी खातों के लेनदेन का नियमानुसार निरीक्षण भी करती है।
बिगड़ सकते हैं हालात
इस मामले में वीरवार को बहस शुरू हुई थी और पूर्ण सिंह के एडवोकेट आरएस बैंस ने कहा था कि मौत का कारण पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम जरूरी है।
इस मामले में सरकार ने कहा था कि पूर्ण सिंह ने पब्लिसिटी के लिए याचिका दायर की है। यदि पोस्टमार्टम करवाया गया तो हालात बिगड़ सकते हैं।