दिव्य ज्योति जागृति संस्थान नूरमहल के प्रमुख आशुतोष महाराज उर्फ महेश कुमार झा के अंतिम संस्कार के मामले में नया मोड़ आ गया है। बिहार विधान परिषद की याचिका समिति के अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह ने इस संबंध में पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को पत्र लिखा है।
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पत्र में कहा गया है कि आशुतोष महाराज का अंतिम संस्कार उनके मधुबनी (बिहार) स्थित गांव लखनौर में करवाए जाने का प्रबंध किया जाए। विनोद कुमार के अनुसार, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने भी पहले मुख्यमंत्री बादल से बात की थी कि महेश कुमार झा का शव उनके परिजनों को सौंपा जाए।
अब जबकि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने आशुतोष महाराज का अंतिम संस्कार 15 दिनों में करवाने के निर्देश जारी कर दिए हैं, तो उनका शव उनके परिजनों को सौंपा जाना चाहिए। बिनोद कुमार सिंह ने पत्र में कहा है कि आशुतोष महाराज बिहार के करोड़ों लोगों की धरोहर हैं और उनके पुत्र दिलीप कुमार झा को अंतिम संस्कार करने का हक मिलना चाहिए।
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दिलीप झा ने की डीएनए टेस्ट कराने की मांग
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान नूरमहल जालंधर प्रमुख महेश कुमार झा उर्फ आशुतोष महाराज का बेटा होने का दावा कर रहे दिलीप झा ने हाईकोर्ट में एक अर्जी दाखिल कर खुद की डीएनए टेस्ट कराने की मांग की थी।
उन्होंने याचिका में कहा था कि डीएनए से सब कुछ साफ हो जाएगा। यदि टेस्ट नहीं हुआ तो वह आशुतोष महाराज का शरीर हासिल करने के अपने हक से महरूम रह जाएंगे। एडवोकेट एसपी सोही के माध्यम से दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होने की संभावना है।
इसमें कहा गया है कि अदालतों के कई फैसलों में स्पष्ट कहा गया है कि किसी व्यक्ति के उसके पिता से संबंध साबित करने के लिए सबसे विश्वसनीय माध्यम डीएनए टेस्ट है। दिलीप का कहना है कि वह खुद इस टेस्ट की मांग कर रहे हैं और इससे सही जांच हो सकेगी कि वह आशुतोष महाराज का बेटा हैं या नहीं।
कोर्ट के फैसले पर आशुतोष महाराज के शव का फैसला
उल्लेखनीय है कि जस्टिस एमएमएस बेदी की एकल बेंच ने 29 अक्तूबर को सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह भी कहा था कि यदि कोई और तथ्य देना चाहता है तो दे सकता है। इसी कारण दिलीप झा ने अर्जी दाखिल की है। फैसला आने पर तय होगा कि आशुतोष महाराज के शव का पोस्टमार्टम होगा या नहीं और शव किसे सौंपा जाएगा।
आशुतोष महाराज के ड्राइवर पूर्ण सिंह की तरफ से सीनियर एडवोकेट आरएस बैंस ने इस मामले की पैरवी करते हुए कहा था कि किसी व्यक्ति की मौत पर यदि कोई भी व्यक्ति आशंका जताकर आपराधिक याचिका दायर करता है, तो मौत की जांच जरूरी है।
वहीं, राज्य सरकार और दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के वकीलों ने पूरा जोर इसी बात पर दिया कि पूर्ण सिंह के पास याचिका दायर करने का अधिकार ही नहीं है। संस्थान के वकील ने कहा था कि दिलीप आशुतोष महाराज का बेटा नहीं हैं। इसी कारण दिलीप ने डीएनए टेस्ट करवाने की अर्जी दाखिल की है।
याचिका में जहर देने की आशंका
सीनियर एडवोकेट आरएस बैंस ने बेंच को बताया कि आशुतोष महाराज की मौत के बाद परिस्थितियों को संदिग्ध बना दिया गया। किसी भी व्यक्ति को शव के पास नहीं जाने दिया जा रहा। इतना ही नहीं, जिन डॉक्टरों ने उन्हें क्लीनिकली डेड घोषित किया था, वे हार्ट स्पेशलिस्ट नहीं थे। डॉक्टरों को संस्थान में दिल के रोग की वजह से बुलाया गया था।
बैंस ने दलील दी कि सरकार ने अपनी जांच के आधार पर यही कहा है कि किसी ने भी विपरीत ब्यान नहीं दिया। जबकि, आशंका जाहिर करने पर डॉक्टरी जांच यानी पोस्टमार्टम करवाना चाहिए था। याचिका में आशुतोष महाराज को कोई विषैला पदार्थ देने की आशंका जाहिर की गई थी।
दिलीप की याचिका पर भी हुई बहस
कोर्ट में दलीप झा के शव मांगने पर भी बहस हुई। दलीप को आशुतोष महाराज का बेटा साबित करने के लिए एडवोकेट एसपी सोही ने एक पत्र पेश किया।
दावा किया गया कि यह पत्र आशुतोष महाराज ने वर्ष 1999 में दलीप को भेजा था। इसमें बताया गया था कि वह अब महेश कुमार झा की बजाय आशुतोष महाराज कहलाने लगे हैं।
इस पत्र पर बेंच ने संदेह प्रकट किया। इससे पहले रंजना देवी और दलीप के मामा शीतल झा के शपथ पत्रों पर भी संस्थान के वकीलों ने आपत्ति जताई। कहा कि शपथ पत्रों के मुताबिक इन दोनों की उम्र संदेह के घेरे में है।
सोही ने फिलहाल इतना कहा कि दलीप बेटा होने के नाते अपने पिता का शव हासिल करना चाहता है, ताकि वह अंतिम संस्कार अपने रीति के अनुसार कर सके। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट के जस्टिस एमएमएस बेदी की एकल बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
याचिकाकर्ता पूर्ण सिंह ने हाईकोर्ट से कहा था कि शव अधिक देर तक नहीं रखा जा सकता। इसके विपरीत डेरे के पैरोकार मानते हैं कि आशुतोष महाराज समाधि में हैं।
इस मामले में पंजाब सरकार मान चुकी है कि डॉक्टरों की राय में आशुतोष महाराज मृत हैं। पूर्ण सिंह ने याचिका में आशंका जताई थी कि डेरे की संपत्ति हड़पने के लिए कुछ अनुयायी आशुतोष महाराज की हत्या कर सकते हैं।
उसने पोस्टमार्टम से मौत के कारणों का पता लगाने की मांग भी की थी। उल्लेखनीय है कि आशुतोष महाराज का शरीर 28 जनवरी रात पौने दो बजे से डेरे में रखा हुआ है। अनुयायियों का मानना है कि महाराज समाधि में हैं और कभी भी समाधि से बाहर आ सकते हैं।