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फरमानः जनहित से जुड़े मुद्दे पर PIL पर जिला अदालत करेगी सुनवाई

Sun, 29 Oct 2017 09:02 AM IST
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Court
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अपनी तरह के एक पहले सामाजिक मुद्दे से जुड़े मामले में दायर सिविल सूट पर सुनवाई करते हुए जिला अदालत ने चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम को नोटिस जारी किया है। सिविल प्रोसिजर कोड 91 के तहत सामाजिक मुद्दे पर दायर सूट पर जिला अदालत जनहित याचिका के तहत सुनवाई करेगी। अदालत ने प्रशासन और नगर निगम को मामले में जवाब दाखिल करने के लिए 14 नवंबर का समय दिया है।
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आमतौर पर पीआईएल (जनहित याचिका) पर हाईकोर्ट ही सुनवाई करता है, लेकिन सीपीसी 91 के तहत जिला अदालत भी आम जनता से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई का अधिकार रखता है। सिविल सूट शहर के सेक्टर-34/35 में अवैध तौर पर सरकारी जमीन/फुटपाथ पर कब्जा जमाए लोगों से जुड़ा हुआ है। इनके कारण आम जनता को यहां से गुजरने में परेशानी होती है। यहां भीख मांगने वालों के कारण अक्सर हादसों की संभावना बनी रहती है। इनके कारण ट्रैफिक भी बाधित होता है।

याचिका में अपील की गई है कि इन अवैध कब्जाधारियों को आम जनता के हित में यहां से हर हाल में हटाया जाए। मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए सीजेएम कोर्ट ने सीपीसी 91 के तहत इस पर सुनवाई को मंजूरी दे दी है। साथ ही प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है। एडवोकेट अवित अवस्थी की ओर से दायर केस में कहा गया है कि सेक्टर-34 और 35 में सौ के करीब लोगों ने अवैध रूप से कब्जा किया हुआ है। ये लोग यहां परिवार के साथ रहते हैं।
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ये लोग यहां से गुजरने वाले ट्रैफिक के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। यह आम पब्लिक के लिए रोजाना परेशानी खड़ी करते हैं। खास तौर पर महिलाएं और छोटे बच्चे यहां ट्रैफिक लाइट पर भीख मांगते हैं। ट्रैफिक से भरी सड़क पर छोटे बच्चे अक्सर सड़क पर दौड़ते देखे जा सकते हैं। इनके कारण यहां अक्सर हादसों की संभावना बनी रहती है और इसके लिए वाहन चालकों को जिम्मेदार ठहराया जाता है। वहीं इनके कारण आम पब्लिक को होने वाली परेशानी को भी इसमें उठाया गया है।

इसके अलावा यहां अवैध रूप से रहने और यहीं सोने वालों के लिए भी अक्सर खतरा बना रहता है। क्योंकि रात में अक्सर तेज रफ्तार वाहन चलने से हादसों का खतरा बना रहता है और ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें फुटपाथ पर सोने वाले इसका शिकार बने हैं। एडवोकेट अवस्थी ने केस में सवाल भी उठाया है कि, एक ओर तो यूटी प्रशासन शहर में होने वाले अवैध कब्जों को हटाने में व्यस्त है, वहीं दूसरी ओर शहर के बीचों-बीच सरकारी जमीन/फुटपाथ पर अवैध रूप से कब्जा जमाये लोगों को रहने दे रही है।
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