चंडीगढ़। जिला अदालत में पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) में सीनेट चुनाव को लेकर चल रहे छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शन के मामले में बुधवार को सुनवाई हुई। पीयू ने पिछले सप्ताह छात्र संगठनों के खिलाफ सिविल केस दायर किया था। इसमें मांग की थी कि इन छात्र संगठनों को वाइस चांसलर और डीन यूनिवर्सिटी इंस्ट्रक्शन (डीयूआई) के कार्यालय के 500 मीटर के दायरे में धरना-प्रदर्शन, घेराव और नारेबाजी करने से रोका जाए।
अदालत में सुनवाई के दौरान छात्र संगठनों के वकीलों ने अदालत में दावा किया कि पीयू प्रशासन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले एक बैठक में आश्वासन दिया था कि अगर छात्र प्रधानमंत्री का पुतला नहीं जलाएंगे और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे तो उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसके अलावा छात्र संगठनों के खिलाफ दायर कोर्ट केस भी वापस लिया जाएगा। छात्र संगठनों ने इस बैठक का आदेश कोर्ट में पेश किया और कहा कि उन्होंने पीयू की शर्तों को माना है इसलिए अब पीयू को केस वापस लेना चाहिए। वहीं, पीयू के वकील ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि छात्र संगठनों ने सिर्फ कुछ शर्तों को माना है। कई शर्तों का अब भी पालन नहीं किया है। अदालत ने इस मामले में सभी पक्षों को लिखित में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई सात दिसंबर को होगी। पीयू का आरोप है कि छात्र संगठनों के धरनों और प्रदर्शन के कारण विश्वविद्यालय का कामकाज प्रभावित हो रहा है और इसीलिए अदालत में यह याचिका दायर की गई है।