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अंबाला-कालका एक्सप्रेस, अमृतसर-चंडीगढ़ एक्सप्रेस के इंजन व मोहाली स्टेशन होगा कुर्क

Thu, 14 Sep 2017 09:19 AM IST
अमित शर्मा/अमर उजाला, मोहाली(पंजाब)
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सालों पहले चंडीगढ़-लुधियाना रेलवे लाइन के लिए एक्वॉयर की गई जमीन का बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं देने के मामले में जिला अदालत ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने अंबाला-कालका एक्सप्रेस, अमृतसर-चंडीगढ़ एक्सप्रेस के इंजन व मोहाली रेलवे स्टेेशन को कुर्क करने के आदेश दिए है।
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मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी। कोर्ट ने साफ किया है कि अगर तय समय में रेलवे ने भुगतान नहीं किया तो इन चीजों की नीलामी कर पैसा वसूल किया जाएगा। इस संबंध में कंबाली निवासी बच्चन सिंह ने केस दायर किया था। 

किसान के वकील गुरविंदर सिंह संधू ने बताया कि इलाके के कुछ किसानों कि 258 कनाल आठ मरले चंडीगढ़ अमृतसर रेलवे लाइन व रेलवे स्टेशन के लिए एक्वॉयर की गई थी। जमीन एक्वॉयर करने की प्रक्रिया 1999 में शुरू हुई थी। इस दौरान गांव कंबाला और कंबाली की जमीन 2001 में एक्वॉयर हुई थी। जब जमीन एक्वॉयर की गई थी तो उस सम प्रति एकड़ किसानों को जमीन का दस लाख रुपये मुआवजा दिया गया था। बच्चन सिंह नाम के किसान की इस दौरान 56 कनाल जमीन एक्वॉयर हुई थी। इसके अलावा कुछ और किसानों की जमीन भी इसके साथ आई थी।
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यह चीजें हुई अटैच 

- फोटो : DEMO Pics
​साथ ही उन्होंने इस संबंध में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में केस दायर किया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने 2016 में रेलवे को प्रति एकड़ 17 लाख रुपये मुआवजा देने को कहा था। लेकिन इसके बाद विभाग लोगों को बढ़ा हुआ मुआवजा देने में फेल रहा था। जिक्रयोग है कि यह दो दिन में कोर्ट का दूसरा फैसला है। जब रेलवे को इस तरह का आदेश दिए गए। इससे पहले रेलवे स्टेशन की बिल्डिंग, रेलवे ट्रेक, स्टेशन मास्टर का आफिस व सामान अटैच किया गया था। 

यह चीजें हुई अटैच 
कोर्ट द्वारा अंबाला कालका एक्सप्रेस का इंजन नंबर 12925 व अमृतसर-चंडीगढ़ एक्सप्रेस का इंजन नंबर 1242 को कुर्क करने के आदेश दिए है। इसे अलावा मोहाली रेलवे स्टेशन की बिल्डिंग को भी कुर्क किया है। 

इनको भी नहीं मिला मुआवजा 
तीन किसान सरदारा सिंह, दरबारा सिंह व बलजिंदर सिंह खूनी माजरा की तरफ से केस दायर किया गया था। साथ ही एक्वॉयर हुई जमीन का मुआवजा बढ़ाने की मांग की गई थी। डिपार्टमेंट द्वारा प्रत्येक किसान की 2.5 कनाल जमीन एक्वॉयर की गई। साथ ही प्रत्येक को 7.5 लाख मुआवजा प्रति एकड़ का दिया गया। जबकि कोर्ट ने मुआवाज बढ़ाकर 23.34 लाख रुपये 2014 में कर दिया था। लेकिन डिपार्टमेंट मुआवजा चुकाने में फेल रहा था।
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