भारतीय चुनाव आयोग ने पंजाब सरकार को एक के बाद एक कई झटके दिए हैं।
जहां मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के फोटो वाले नीले कार्डों पर छह महीने का एडवांस वितरण करवाने पर रोक लगाई है, वहीं पुलिस अधिकारियों को क्लीन चिट देती रिपोर्ट गृह विभाग के प्रमुख सचिव की टिप्पणी के लिए वापस भेज दी है।
आयोग ने एडीजीपी की रिपोर्ट पर असंतुष्टि जाहिर की है। इसके साथ ही बठिंडा में कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन पर भी सख्ती दिखाई है।
चुनाव आयोग ने सोमवार को राज्य सरकार को निर्देश जारी किए कि नीले कार्ड धारकों को 6 माह का अनाज एडवांस में वितरित नहीं किया जा सकता।
योग्य लाभपात्रियों को केवल चालू माह अनाज का वितरण ही राशन डिपो द्वारा किया जा सकता है। सरकार को स्पष्ट कर दिया गया है कि किसी भी फूड एंड सप्लाई इंस्पेक्टर या राजनेता द्वारा अनाज वितरण की आज्ञा नहीं दी जा सकती।
वहीं, पंजाब के मुख्य चुनाव अधिकारी ने प्रमुख सचिव गृह को कहा है कि वह सीनियर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों संबंधी अपनी टिप्पणी भेजें, एडीजीपी चुनाव सेल की ओर से भेजी गई रिपोर्ट से चुनाव आयोग संतुष्ट नही हैं।
एडीजीपी चुनाव सेल द्वारा भेजी रिपोर्ट को केंद्रीय चुनाव आयोग ने संतोषजनक नहीं माना। जांच के दौरान शिकायतकर्ता को शामिल नहीं किया गया।
इसके मद्देनजर मुख्य चुनाव अधिकारी ने प्रधान सचिव गृह को एडीजीपी की रिपोर्ट पर 24 घंटों में अपनी टिप्पणी देने के लिए कहा है।
गौरतलब है कि बठिंडा के पुलिस अफसरों के खिलाफ पीपीपी अध्यक्ष मनप्रीत सिंह बादल ने शिकायत की थी कि वह सांसद हरसिमरत कौर बादल और उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के दबाव में काम कर रहे हैं।
वहीं, विधायक सुखजिंदर सिंह रंधावा ने शिकायत की है कि डेराबाबा नानक के एसएचओ शिअद के प्रभाव में काम कर रहे हैं। इसलिए उन्हें हटाया जाए।
उन्होंने मांग की है कि एसएसपी गुरदासपुर को निर्देश दिए जाएं कि वह अकाली वर्करों के लाइसेंसी हथियार जमा करवाने में सख्ती दिखाएं। दोनों मामलों में रिपोर्ट तलब की गई है।