पाकिस्तान के सियालकोट शहर में मौजूद गुरू नानक साहिब की यादगार गुरुद्वारा बाबे दी बेर में गुरुबाणी की बेकद्री हुई है।
गुरुद्वारे के नव-निर्माण के दौरान गुरुद्वारे की दीवारों पर बने गुरू साहिबान के खूबसूरत तैल-चित्रों, गुरुबाणी की पवित्र पंक्तियां मिटा दी गई हैं।
गुरुद्वारा बाबे दी बेर में बनाई गईं तैल चित्रों की रंगीन तस्वीरें जारी करते हुए इतिहास शोधकर्ता सुरेंद्र कोछड़ ने मंगलवार को यह खुलासा किया।
कोछड़ ने बताया कि बाबरी मस्जिद विवाद के दौरान स्यालकोट की जफ रवाल रोड की निक्कापुरा आबादी के उक्त गुरुद्वारे की इमारत को भारी नुकसान पहुंचाया गया था।
इसके बाद सिख समुदाय की मांग पर 30 जनवरी 2012 को ईटीपीबी के पूर्व चैयरमेन सैयद आसिफ हाशमी ने ऐतिहासिक गुरुद्वारे के नव-निर्माण का काम शुरू करवाया। गुरुद्वारा साहिब की दीवारों पर सफेद चूने की पुताई कर सभी पुरातन निशानियां खत्म कर दी गईं ।
गुरू नानक साहिब संवत 1561 में यहां पधारे थे और जिस बेरी के वृक्ष के नीचे वे अंतर्ध्यान हुए, वह अब भी कायम है। परंतु अब उस स्थान पर कथित नरोज़ शाह पीर की कब्र बना दी गई है।