हरियाणा में गेहूं खरीद को लेकर किसानों के खातों में सीधे भुगतान का विरोध कर रहे आढ़तियों की मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ बातचीत बेनतीजा रही। किसानों के खाते में सीधे भुगतान पर पेंच फंस गया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल का आश्वासन पर भी आढ़ती नहीं माने और बोले कि 7 अप्रैल तक उनकी मांगें नहीं मानी तो गेहूं तुलाई बंद करेंगे।
सोमवार देर शाम मुख्यमंत्री आवास पर करीब तीन घंटे तक बैठक चली। इसमें दो मांगों पर सहमति बनी, लेकिन किसानों के खाते में सीधे भुगतान के मुद्दे पर पेंच फंस गया। आढ़ती मांग करते रहे कि फसल खरीद की राशि खाते में किसानों की सहमति से डाली जाए। पोर्टल पर किसान के विवरण के अनुसार इसे वैकल्पिक किया जाए। इस पर मुंख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि वे इस बारे में एफसीआई के आला अधिकारियों से बात करेंगे, इसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
बैठक से बाहर निकलने बाद आढ़तियों ने सरकार को 7 अप्रैल तक का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर उनकी मांगें न मानी गई तो 8 अप्रैल से पूरे प्रदेश में गेहूं की तुलाई का काम बंद देंगे। अब अगली बैठक पर निर्भर रहेगा कि अंतिम फैसला क्या होगा।
अपनी मांगों पर अडिग हैं आढ़ती
हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के कार्यकारी प्रधान रजनीश चौधरी ने बताया कि शाम 6.30 बजे से रात 9.30 बजे तक हुई बैठक में सभी मांगों पर विचार किया गया। फिलहाल किसानों के सीधे पेमेंट पर मामला अटका हुआ है। सीएम ने आश्वासन दिया है कि वे इसको लेकर केंद्र में एफसीआई के अधिकारियों से बात करेंगे। आढ़ती अपनी मांगों पर अडिग हैं। हमारी मांग साफ है कि पोर्टल पर जिस किसान ने खुद के खाते में राशि मांगी है, उसके खाते में डाली जाए। जिसने आढ़ती के माध्यम से लिखी है, उसके अनुसार पेमेंट की जाए।
इन दो मांगों पर बनी सहमति
बैठक में आढ़तियों की बकाया राशि और ब्याज के मामले में सीएम ने कहा कि इसको लेकर एक प्रोफार्मा तैयार किया जाएगा और आढ़तियों को शेष राशि और ब्याज की अदायगी की जाएगी। वहीं, बारदाने पर दुकान का मार्का लगाने को लेकर भी सरकार ने अपने कदम पीछे कर लिए और सहमति बनी कि इस बार मार्का लगाने की जरूरत नहीं है।
14 जिलों के प्रधानों समेत आला अधिकारी रहे मौजूद
आढ़तियों के प्रतिनिधिमंडल में 14 जिलों के मंडी प्रधान मौजूद रहे। सरकार की तरफ से कृषि मंत्री जेपी दलाल, उमा शंकर, कृषि विभाग की एसीएस डॉ. सुमित्रा मिश्रा, मार्केटिंग बोर्ड के मुख्य प्रशासक विनय सिंह, हैफेड के एमडी डीके बहरा समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में एक-एक पहलू पर गंभीरता के साथ विचार किया गया।