पार्षद सतीश कैंथ को जेल ले जाती पुलिस
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भाजपा पार्षद सतीश कैंथ के आत्मसमर्पण से शहर की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस ने इस पर मेयर अरुण सूद और पार्षद कैंथ के इस्तीफे की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि जिला और पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत रद्द होने के बावजूद भाजपाध्यक्ष और मेयर ने उनकी गिरफ्तारी नहीं करवाई । इन दोनों नेताओं का ही कैंथ को सरंक्षण मिला हुआ था। अब कैंथ के आत्मसमर्पण के बाद कैंथ को पार्षद पद से बर्खास्त कर देना चाहिए और मेयर को इस्तीफा दे देना चाहिए।
नगर निगम सदन की आगामी बैठक में कांग्रेस कैंथ मामले में जमकर हंगामा कर सकती है। गौरतलब है कि पिछली बैठक में कांग्रेस ने कैंथ पर मामला दर्ज होने पर उनके इस्तीफे की मांग करते हुए जमकर हंगामा किया था। मेयर और भाजपा अध्यक्ष कैंथ का खुलकर समर्थन दे रहे हैं। यह नेता कैंथ के मामले को दो लोगों का निजी मामला बता रहे हैं।
कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए थे कैंथ सतीश कैंथ ने नगर निगम चुनाव कांग्रेस की टिकट पर जीता था, लेकिन पिछले साल वह कांग्रेस के सीनियर नेताओं से नाराज होकर भाजपा में शामिल हो गए थे। कांग्रेस में रहते हुए कैंथ पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल और उनके परिवार के करीबी थे। जबकि भाजपा में वह अध्यक्ष संजय टंडन और मेयर अरुण सूद के काफी करीबी हो गए।
थाने में मिलने जिला अध्यक्ष गए रिमांड के दौरान थाने में कैंथ से मिलने जिला अध्यक्ष देवी सिंह, शक्ति प्रकाश देवशाली और युवा मोर्चा अध्यक्ष अमित राणा पहुंचे।
अरुण सूद, मेयर के मुताबिक कैंथ ने सरेंडर कर दिया है और कानून अपना काम कर रहा है। कैंथ के साथ न्याय होगा। उनका ज्यूडीशियरी पर पूरा विश्वास है। दूध का दूध और पानी का पानी होगा।
राजेश शर्मा, कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया कि मेयर को इस्तीफा देना चाहिए और कैंथ को नगर निगम के पार्षद से बर्खास्त कर देना चाहिए। क्योंकि अभी तक कैंथ को मेयर और भाजपा अध्यक्ष का ही सरंक्षण मिला हुआ था। इसी कारण पुलिस उनको गिरफ्तार नहीं कर रही थी। जिस तरह भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन और मेयर अरुण सूद ने सतीश कैंथ को अपना अनुचित समर्थन दिया है, उससे यह भी स्पष्ट होता है कि उनके अनुचित दबाव के कारण ही मामला दर्ज करने में देरी की गई। इसके चलते एक विधवा को न्याय के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं।