महात्मा गांधी हत्याकांड में गिरफ्तार किए गए वीर सावरकर की मदद के लिए वकील एसजीपीसी के सात बार प्रधान रहे मास्टर तारा सिंह ने खड़े किए थे। यह बयान पूर्व सांसद व अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन त्रिलोचन सिंह ने उस समय दिया जब भाजपा के राष्ट्रीय प्रधान जेपी नड्डा मोदी और सिख किताब का विमोचन कर रहे थे। इस बयान पर मौके पर तो कोई विवाद या शोर शराबा नहीं हुआ अलबत्ता पंजाब व सिख समुदाय में एक विवाद व बहस छिड़ गई है। समारोह में कई सिख समुदाय के नेतागण भी मौजूद थे। मास्टर तारा सिंह की दोहती एसजीपीसी की सदस्या बीबी किरणजोत कौर ने तो इसका डटकर विरोध किया है।
त्रिलोचन सिंह ने कहा कि 30 जनवरी 1948 को गांधी जी की हत्या हो गई। उस समय जो नेता गिरफ्तार किए गए, उनमें वीर सावरकर भी शामिल थे। यह मुकद्दमा दिल्ली के लाल किले में चलाया गया था। गांधी का हत्यारा गोडसे भी आरोपियों में शामिल था। उस समय आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने के सरकारी आदेश दिए गए थे। सरकार की नीति के कारण उस समय अन्य सभी नेता तो दुबक गए लेकिन मास्टर तारा सिंह ने वीर सावरकर की सहायता की घोषणा कर दी।
यह भी पढ़ें: जूनियर कोच यौन शोषण केस: चंडीगढ़ पुलिस की चार्जशीट से रोज चौंकाने वाले खुलासे, मंत्री संदीप सिंह पर कसा शिकंजा
सावरकर की मदद से नाराज थी कांग्रेस सरकार
मास्टर जी ने बयान दिया कि सावरकर निर्दोष हैं। वह महात्मा गांधी के विरुद्ध अवश्य हैं लेकिन उनकी हत्या में शामिल नहीं हो सकते। मास्टर जी स्वयं दिल्ली पहुंचे और वकील खड़े किए। पूरा खर्च उन्होंने अपने पास से किया। यही नहीं, मास्टर जी स्वयं कचहरी जाते और वहां बैठते, जोकि इस बात का प्रमाण था कि वह सावरकर के दोस्त थे। कांग्रेस सरकार ने इसका बुरा माना और मास्टर जी के विरुद्ध प्रचार किया कि वह गांधी के हत्यारे के साथी हैं। जब तक वीर सावरकर मुकद्दमे से बरी नहीं हो गए, मास्टर जी हर प्रकार की सहायता करते रहे।
कांग्रेस सरकार ने मास्टर तारा सिंह को जेल में डाला
कांग्रेस सरकार ने मास्टर तारा सिंह को जेल में डाल दिया था। त्रिलोचन सिंह का कहना है कि यह बात सच्ची है, अगर उन पर यकीन नहीं है तो उस समय दो उर्दू के समाचार पत्र छपते थे उनको निकाल लिया जाए हकीकत सामने आ जाएगी। त्रिलोचन सिंह का कहना है कि वीर सावरकर ने भी दोस्ती की मर्यादा अदा की लेकिन यह एक अजीब करिश्मा ही था कि मास्टर जी सिखों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले और वीर सावरकर हिन्दू महासभा के अध्यक्ष-दोनों इतनी गहरी दोस्ती का उदाहरण बन गए।
यह भी पढ़ें: Raghav-Parineeti: चंडीगढ़ में होगी परिणीति-राघव चड्ढा की रिसेप्शन, पंजाबी रीति रिवाज से बंधेंगे बंधन में
बीबी किरणजोत सिंह ने किया विरोध
त्रिलोचन सिंह के इस दावे पर मास्टर तारा सिंह की दोहती एसजीपीसी सदस्य बीबी किरणजोत कौर का कहना है कि यह बात यकीन के काबिल ही नहीं है। उनके दादा मास्टर तारा सिंह को सिखों को लेकर फोकस थे। उनकी फौज में भर्ती करवाना, सिखों को खड़ा करना ही उनका मकसद था। आजाद भारत में पहली गिरफ्तारी मास्टर तारा सिंह की हुई लेकिन यह गिरफ्तारी वीर सावरकर के कारण नहीं बल्कि सिखों से किए वादे से सरकार मुकर गई थी तो मास्टर जी ने सरकार का विरोध किया था। बीबी किरणजोत कौर ने कहा कि उनके परिवार में कभी न ऐसी बात हुई न ही सुनी। यह किसी किताब में या फिर इतिहास में नहीं है।
पंजाब के पूर्व मंत्री डॉ. दलजीत सिंह चीमा का कहना है कि त्रिलोचन सिंह केंद्र सरकार की खुशामदगी कर रहे हैं। दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रधान परमजीत सिंह सरना का कहना है कि वह त्रिलोचन सिंह को चुनौती देते हैं कि एक भी फोटो या समाचार पत्र निकालकर सामने लाओ, यह सरासर झूठ है। मास्टर तारा सिंह को तो इसलिए जेल में भेजा गया था क्योंकि उन्होंने सिख कौम, पंथ व पंजाब के हितों की आवाज उठानी शुरू की थी। सरना का कहना है कि त्रिलोचन सिंह के इस बयान से उनका किरदार सिख कौम की नजरों में गिर गया है।