इससे सुखमणी साहिब का पाठ किए बिना ही श्री गुरु ग्रंथ साहिब को वापस गुरुद्वारा साहिब ले जाया गया। इसके बाद मौजूदा सरपंच व पूर्व सरपंच के गुट में विवाद हुआ। देर शाम तक गांव में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ था।
गांव के पूर्व सरपंच नारायण सिंह, गुरदेव सिंह, अवतार सिंह, अजैब सिंह, सुच्चा सिंह सहित अन्य ने बताया कि बुधवार सुबह करीब साढे 11 बजे पता चला कि स्थानीय गुरुद्वारा साहिब से श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश नजदीक स्थित मीट प्लांट में किया जा रहा है।
इस बारे में उन्होंने गुरुद्वारा कमेटी के सदस्यों से पूछा, लेकिन 11 सदस्यों में से एक उप प्रधान को छोड़कर किसी को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। इस पर ग्रामीण भड़क उठे और मीट प्लांट के बाहर जमा होने लगे। इस पर प्लांट से श्री गुरु ग्रंथ साहिब को पिछले दरवाजे से वापस गुरुद्वारा साहिब ले जाया गया।
आक्रोशित लोगों का कहना था कि मीट प्लांट में श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश करना गलत है। इस बारे में उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के स्थानीय सदस्य निरमैल सिंह जौलाकलां को भी फोन पर सूचना दी। उनका कहना है कि इस बारे में एसजीपीसी को शिकायत कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे।
वहीं मौके पर विवाद की सूचना मिलने पर पहुंचे सरपंच बलविंदर कौर के पति गुलाब सिंह ने बताया कि उन्होंने वहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश करने की सहमति दी थी, लेकिन उन्होंने सुखमणी साहिब का पाठ किए बिना जल्दबाजी में वापस लाने के लिए नहीं कहा। इसके लिए उन्होंने गुरुद्वारा साहिब के ग्रंथी को कसूरवार बताया।
मीट प्लांट में सुखमणी साहिब का पाठ करवाने के लिए सरपंच के पति व गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के उप प्रधान की सहमति से गुरु ग्रंथ साहिब को ले जाया गया था। अभी अरदास ही की थी कि लोग इसके विरोध में एकत्र हो गए। इसका पता चलते ही पाठ किए बिना ही वापस आ गए।
-गुलजार सिंह, ग्रंथी
मुझे इस मामले की सूचना फोन पर ही मिली है। गांव के लोग लिखित में शिकायत देंगे तो मामले की जांच करवाकर आरोपी के खिलाफ धार्मिक कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
-निरमैल सिंह जौलाकलां, एसजीपीसी सदस्य