नगर निगम चुनाव के लिए टिकट के आवेदन के साथ शपथ पत्र लेने के फरमान से कांग्रेसी नेताओं में घमासान मच गया है। तिवारी गुट खुलकर इसके विरोध में आ गया है, जबकि छाबड़ा गुट के कुछ वरिष्ठ नेता शपथ पत्र लेने का समर्थन कर रहे हैं।
तिवारी गुट के सीनियर नेता चंद्रमुखी शर्मा का कहना है कि जिन नेताओं को 25 से 30 साल पार्टी में काम करते हो गया है उनसे शपथ पत्र मांग कर उनके साख पर सवाल खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शपथ पत्र सिर्फ सरकार और कोर्ट में ही दिए जा सकते हैं।
शर्मा का कहना है कि पिछले दो साल में जो पार्षद पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं असल में वह असली कांग्रेसी थे ही नहीं। राज बाला मलिक को नगर निगम चुनाव से चंद दिन पहले ही टिकट दिया गया, जबकि सतीश कैंथ और सतप्रकाश अग्रवाल सिर्फ बंसल के घर तक ही सीमित थे।