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कौशल्या बांध निर्माण में धांधली, कैग का खुलासा

Sat, 28 Mar 2015 01:47 AM IST
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
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नियंत्रक व महालेखापरीक्षक (कैग) ने पंचकूला शहर को जलापूर्ति के लिए पिंजौर के निकट बनाए गए कौशल्या बांध केनिर्माण में जमकर धांधली की बात मानी है। हालांकि, इस मामले में राज्य की भाजपा सरकार ने जांच के आदेश दे रखे हैं।
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कैग ने वर्ष 2013-14 की रिपोर्ट में कहा है कि मात्र 51.37 करोड़ की इस परियोजना को इतनी लंबी अवधि तक खींचा गया कि परियोजना 217 करोड़ की हो गई। इतना ही नहीं, परियोजना पर काम करने वाली एजेंसी से लिक्यूडेटड पेनाल्टी भी नहीं वसूली।

हरियाणा विधानसभा सत्र के दौरान सदन पटल पर रखी गई कैग की रिपोर्ट में कार्यकारी अभियंता, घग्गर डैम मंडल पंचकूला के आडिट में कई गड़बड़ियों का खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2005 में शुरू हुई इस परियोजना का उद्देश्य पंचकूला शहर को जलापूर्ति करना, भूजल रिचार्ज करना, अस्थायी बाढ़ पर नियंत्रण करना और जलाशय में मछली पालन को बढ़ावा देना था।
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बाद में, भूमि की लागत और हुडा द्वारा नदी के दूसरी ओर सेक्टरों को रास्ता मुहैया कराने के लिए बांध की ऊंचाई व ऊपरी चौड़ाई बढ़ाने का फैसला लेते हुए परियोजना का काम सितंबर 2011 तक खिंच गया और लागत 217 करोड़ तक जा पहुंची। सिंचाई विभाग ने मई 2013 तक 208.37 करोड़ की लागत से बांध की ऊंचाई 34 मीटर और चौड़ाई 30 मीटर बढ़ा दी।

निर्माण कंपनी को पहुंचाया लाभ
कैग ने कहा है कि नियमानुसार, निर्माण एजेंसी केहर रनिंग बिल पर 10 फीसदी की दर से राशि काटी जानी चाहिए थी, जिसके लिए विभाग ने 52.99 करोड़ के इकरारनामे के हिसाब से कटौती की, जबकि परियोजना की राशि 217 करोड़ हो चुकी थी और कटौती इसी राशि पर की जानी चाहिए थी।

बांध के जलाशय में पानी ही नहीं
कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि हुडा ने पंचकूला शहर को कौशल्या बांध से पानी की सप्लाई के लिए अप्रैल 2013 में 43.25 करोड़ रुपये खर्च करके पाइप लाइनें बिछा दीं, लेकिन बांध के जलाशय में पानी ही नहीं था। इसके चलते, जिस उद्देश्य से बांध बनाया गया था, वह पूरा नहीं हो सका। यह भी खास बात है कि इस बांध में 460 मीटर के जल स्तर पर ही पंचकूला को पानी की आपूर्ति हो सकती है, लेकिन निर्माण से आज तक इस बात में अधिकतम जल स्तर 456.90 मीटर ही नापा जा सका है। यानी बांध में कभी भी अपेक्षित मात्रा में पानी नहीं आया है।

प्रमुख अभियंता की ढिलाई पर उठाई उंगली
कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि कौशल्या बांध के निर्माण कार्य का आवंटन मार्च 2008 में एक एजेंसी को किया गया था और सारा काम 30 जून 2010 तक पूरा किया जाना था। काम में देरी होने पर समझौते के तहत एजेंसी के खिलाफ 10 फीसदी लिक्यूडेटड पेनाल्टी लगाई जानी थी।

निर्माण एजेंसी के लिए पहले 31 मार्च 2011 तक समय सीमा बढ़ाई गई, लेकिन जून 2012 में ही काम पूरा हो सका, लेकिन विभाग ने एजेंसी पर 11.29 करोड़ की लिक्यूडेटड पेनाल्टी नहीं लगाई। प्रमुख अभियंता ने 18 महीने बाद यही जवाब दिया कि अभी पेनाल्टी राशि पर विचार किया जा रहा है। कैग ने इस पर सवाल किया है कि पेनाल्टी राशि तय करने में 18 महीने क्यों लग गए।
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