मौलीजागरां में गंदे पानी और जर्जर सीवर व्यवस्था.... मौत के बाद नालियों की सफाई और सीवर काम काम करने पहुंचा प्रशासन
पिता बोले- नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से गई जान
सवाल यही है...क्या सच में व्यवस्था सुधरेगी? स्थानीय लोग नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली और उठा रहे सवाल
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। पानी बहुत गंदा आता है...आए दिन कोई न कोई बीमार पड़ जाता है। पहले बेटी को पीलिया हुआ था। दवाइयों से उसकी हालत संभल गई थी लेकिन फिर गंदे पानी की सप्लाई शुरू हो गई। वही पानी पीने से उसकी तबीयत दोबारा बिगड़ गई। इस बार हालात इतने खराब हो गए कि मेरी आठ साल की बेटी श्रेया को डॉक्टर भी नहीं बचा सके। यह कहते हुए श्रेया के पिता सूरज की आंखें भर आईं। मौके पर मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। अमर उजाला की टीम के साथ पीड़ा साझा करते हुए उनका गला भर आया। भर्रायी आवाज में बड़ी मुश्किल से अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ने उनकी लाडली को छीन लिया। मां की हालत इतनी खराब है कि वह किसी से बात करने की स्थिति में नहीं हैं। सीने में दर्द की शिकायत के चलते उन्हें भी डॉक्टर को दिखाना पड़ा।
मौलीजागरां इलाके में स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की बदहाल व्यवस्था ने मासूम की जान ले ली। श्रेया माता-पिता की इकलौती बेटी थी। श्रेया की मौत के बाद नगर निगम प्रशासक हरकत में आया। सड़क की मरम्मत का प्रयास किया गया और सीवर साफ करने के लिए मशीन भेजी गई। निगम कर्मचारी मैनहोल ठीक करते नजर आए लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब सिर्फ दिखावा है। सवाल यही है...क्या सच में व्यवस्था सुधरेगी?
लोगों का कहना है कि करीब 33 साल पहले मौलीजागरां में सीवर लाइन और पानी की पाइप लाइन डाली गई थी। आबादी दो से तीन गुना बढ़ गई है। अब तक वही पुरानी सीवर और पानी की लाइनें चल रही हैं। कई जगह सीवर लाइन और पानी की पाइप लाइन संपर्क में आ जाती हैं जिसकी वजह से गंदा पानी आता है। पिछले छह दिन से पानी की सप्लाई भी बंद थी। चंडीगढ़ के इस इलाके के लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।
चार साल से नहीं हो रहा समाधान
पार्षद मनोज सोनकर का कहना है कि चार साल से सदन में मुद्दा उठा रहे हैं लेकिन काम ठीक से नहीं हो रहा। पानी की समस्या का समाधान उसी दिन होना चाहिए लेकिन इसमें कम से कम तीन दिन लग जाते हैं। ट्यूबवेल खराब होने पर एक दिन पार्ट खोला जाता है दूसरे दिन ठीक किया जाता है और तीसरे दिन दोबारा लगाया जाता है। इलाके में छह दिन से टैंकर से पानी की सप्लाई हो रही है। पूरे वार्ड में 14 बोर हैं जिनमें से दो नियमित रूप से खराब रहते हैं। वार्ड की आबादी करीब एक लाख है लेकिन निगम उस हिसाब से व्यवस्था नहीं दे पा रहा है।
4500 मीटर सीवर लाइन कागजों में चोक
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार करीब 4500 मीटर सीवर लाइन ओवरफ्लो हो चुकी है। इसके लिए अलग से नई लाइन डालने का प्रस्ताव बनाया गया है जिस पर करीब एक करोड़ 20 लाख रुपये खर्च आएगा इसके अलावा छह किलोमीटर पानी की पाइप लाइन बदलने की जरूरत है लेकिन यह काम कब शुरू होगा कोई नहीं बता पा रहा है। लोगों का आरोप है कि फाइलें महीनों तक रोकी जाती हैं। अब वह इस मामले को लेकर प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से गुहार लगाएंगे।
क्या कहते हैं स्थानीय निवासी
ठीक से नहीं हो रहा है काम
पानी काफी गंदा आ रहा है। छह दिन से टैंकर से पानी की सप्लाई हो रही थी। एक मौत के बाद नगर निगम ने काम शुरू किया है। लेकिन काम भी ठीक से नहीं हो रहा है। बजरी डालकर काम चलाया जा रहा है, गंदगी साफ दिख रही है। - संतोष कुमार
स्वास्थ्य विभाग और निगम जिम्मेदार
बेटी नहीं बची, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम जिम्मेदार है। पास में रहने वाले अजय कुमार भारती के बच्चे की तबीयत भी खराब है उसे पीजीआई में भर्ती कराया गया है। - सूरज
सीवर लाइन चोक रहती है। सड़क खराब है। बुनियादी सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है। जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। - विजय यादव
सख्त कार्रवाई हो... हर व्यवस्था फेल
विभागीय लापरवाही के चलते बच्ची की जान गई है। इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। यहां सड़क से लेकर सीवर और पानी तक हर व्यवस्था फेल है। - संदीप कुमार
कोट...
घटना बेहद गंभीर है। स्वच्छता व पेयजल व्यवस्था में लापरवाही को उजागर करती है। अधिकारी इलाके में पानी की आपूर्ति तुरंत दुरुस्त करें। सीवर लाइनों की पूरी तरह सफाई कराई जाए। साथ ही जहां जरूरत हो वहां सुरक्षित पेयजल के अस्थायी इंतजाम किए जाएं। -सौरभ जोशी, मेयर
कोट...
मामला संज्ञान में आया है। वहां काम कराया जाएगा। सीवर लाइन से लेकर पानी की व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा। अलग से सीवर लाइन बिछाने का जो प्रस्ताव है उस काम को भी कराया जाएगा। हालांकि इसमें थोड़ा समय लग सकता है लेकिन फौरी तौर पर वहां समस्याओं के समाधान के लिए निर्देश दिया गया है। - अमित कुमार, नगर कमिश्नर