गुरदासपुर जिले के दीनानगर आतंकी हमले में जख्मी पुलिसकर्मियों को तरक्की के फैसले के बावजूद एक इंस्पेक्टर को डीएसपी नहीं बनाने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका पर पंजाब सरकार के पास अभी कोई जवाब नहीं है। जवाब देने के लिए हाईकोर्ट से और समय मांगा गया है, अब अगली सुनवाई 23 मई को होगी।
आतंकियों की गोली का सामना करने वाले इंस्पेक्टर बलबीर सिंह ने अदालत से तरक्की की गुहार लगाई थी। हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था, लेकिन अभी इस मामले में सरकार के पास कहने को कुछ नहीं है।
दीनानगर थाने में पिछले साल 27 जुलाई को आतंकियों का सामना करते हुए बलबीर सिंह गोलियों का शिकार हुए थे। तारा सिंह नामक एक हवलदार को भी गोली लगी थी। इंस्पेक्टर बलबीर सिंह के सीने और पेट में गोलियां लगी थीं। दो ऑपरेशन के बाद भी वह लंबे समय तक तंदुरुस्त नहीं हो पाए। अब तीसरे ऑपरेशन के बाद ड्यूटी पर लौटे हैं।
पंजाब मंत्रिमंडल ने दीनानगर ऑपरेशन के सभी पुलिसकर्मियों को तरक्की देने का फैसला तीन अगस्त को ले लिया था। इसके अलावा गोलियां लगने से जख्मी हुए बलबीर सिंह, तारा सिंह और एसपी बलजीत सिंह (मरणोपरांत) को राष्ट्रपति पुलिस मेडल से सम्मानित करने का फैसला लिया था।
स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित भी किया गया। कैबिनेट के फैसले के मुताबिक एसपी बलजीत सिंह के बेटे को डीएसपी भर्ती कर लिया गया और हलवदार तारा सिंह को तरक्की दे दी गई।
कैबिनेट के फैसले के आधार पर ही इंस्पेक्टर बलबीर सिंह ने पुलिस विभाग के पास तरक्की का आवेदन किया, लेकिन उन्हें यह कहते हुए तरक्की देने से इनकार कर दिया कि उन्हें राष्ट्रपति पुलिस मेडल से सम्मानित किया जा चुका है, लिहाजा तरक्की नहीं दी जा सकती।
इसी कारण बलबीर सिंह ने एडवोकेट हरचंद सिंह बाठ के माध्यम से याचिका दायर कर कहा था कि एसपी बलजीत सिंह (मरणोपरांत) व हवलदार तारा सिंह को भी इसी मेडल से सम्मानित किया गया था, लेकिन तरक्की भी दी गई।
ऐसे में उसे तरक्की से इनकार करना अनुचित है। हाईकोर्ट से मांग की थी कि तरक्की से इनकार करने का फैसला रद्द किया जाना चाहिए और सरकार को तरक्की देने का निर्देश जारी किया जाए।
उल्लेखनीय है कि बलबीर सिंह वर्ष 1992 में पंजाब पुलिस में एएसआई भर्ती हुए थे। वर्ष 2005 में वह एसआई और वर्ष 2011 में इंस्पेक्टर पदोन्नत हुए थे।
वह आतंकियों से निपटने के लिए बने स्पेशल ऑपरेशन सेल अमृतसर में तैनात थे। दीनानगर घटना के वक्त 27 जुलाई को सुबह ही उन्हें उच्चाधिकारियों ने अमृतसर से दीनानगर बुला लिया था और आतंकी खात्मा ऑपरेशन में वह सबसे आगे थे। इसी दौरान वह आतंकियों की गोलियों से घायल हो गए थे।