शहर में डीजल ऑटो की लगातार बढ़ती तादात और उनसे फैलने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट विभाग ने नई ऑटो पॉलिसी लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है।
डीजल ऑटो से निकलने वाले धुएं की वजह से सिटी ब्यूटीफुल की आबोहवा में जहर घुल रहा है और रिस्पायरेबल सस्पेंडिड पर्टिक्यूलेट मैटर (आरएसपीएम) का लेवल भी दोगुना हो चुका है।
चंडीगढ़ में करीब तीन हजार डीजल ऑटो रजिस्टर्ड हैं। साथ ही मोहाली-पंचकूला से भी रोजाना सैकड़ों ऑटो चंडीगढ़ आते हैं। ऐसे में प्रदूषण का स्तर भी तेजी से बढ़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, अप्रैल में सीटीयू का नया रूट प्लान लागू होने और नई बसों की खेप पहुंचने के बाद एसटीए डीजल ऑटो पर शिकंजा कसना शुरू करेगा। डीजल ऑटो पर सख्ती के लिए ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर विशेष अभियान चलाया जाएगा।
साथ ही सीएनजी ऑटो को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। इसलिए प्रशासन पहले ही बैंक के साथ एमओयू साइन कर चुका है, जिसके तहत डीजल ऑटो चालकों को कम ब्याज पर सीएनजी ऑटो दिलाया जाएगा।
पिछले साल में चर्चा में रहा था ऑटो का मुद्दा
साल 2014 में भी ट्रांसपोर्ट विभाग डीजल ऑटो के मसले पर काफी चर्चा में रहा है। विभाग ने ऐसे ऑटो को पूरी तरह से बैन कर दिया था, जिसके विरोध में ऑटो यूनियन ने हड़ताल कर दी।
तत्कालीन प्रशासक शिवराज वी. पाटिल के दखल के बाद इन ऑटो को चलाने की फिर से अनुमति मिली थी। अब प्रशासक कप्तान सिंह सोलंकी ऑटोमेशन इंस्पेक्शन सेंटर को हरी झंडी दे चुके हैं और प्रशासन के अधिकारी नई ऑटो पॉलिसी के लिए भी उम्मीद लगाए बैठे हैं।