चंडीगढ़। भगवान जगन्नाथ की पावन रथयात्रा से पहले सोमवार को देव स्नान पूर्णिमा का पर्व सेक्टर-31 स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का 108 पवित्र कलशों के जल, पंचामृत तथा सुगंधित द्रव्यों से विधि-विधानपूर्वक महाअभिषेक किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपने हाथों से भगवान का स्नान कराकर पुण्य लाभ अर्जित किया। मंदिर परिसर में पूरे दिन भजन-कीर्तन, संकीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता रहा तथा देर शाम तक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
महाअभिषेक के बाद परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ अनासर काल में प्रवेश कर गए। धार्मिक मान्यता के अनुसार स्नान के उपरांत भगवान 15 दिनों तक अस्वस्थ रहते हैं। इस दौरान उनके दर्शन श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेंगे। भगवान की सेवा जड़ी-बूटियों और पारंपरिक आयुर्वेदिक विधि से की जाएगी। इस अवधि में मंदिर में नियमित कीर्तन-आरती नहीं होगी, घंटा-घड़ियाल नहीं बजाए जाएंगे और पूरे परिसर में शांत वातावरण रखा जाएगा।
उत्कल सांस्कृतिक संघ के सांस्कृतिक सचिव अनिल मलिक ने बताया कि देव स्नान पूर्णिमा सनातन परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। उन्होंने कहा कि अनासर काल समाप्त होने के बाद भगवान जगन्नाथ नवयौवन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे। इसके पश्चात 16 जुलाई को सेक्टर-31 स्थित मंदिर से भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा सुसज्जित रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगे, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि रथयात्रा से लेकर 24 जुलाई को आयोजित होने वाली बहुड़ा यात्रा तक मंदिर में भजन संध्या, संकीर्तन, धार्मिक अनुष्ठान और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ से सभी के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
इस अवसर पर मंदिर के प्रधान डॉ. आरके रथो, चेयरमैन डॉ. डी बेहरा, महासचिव बी पात्रा सहित कार्यकारिणी के सभी सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।