गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही पंजाब सरकार ने किसी तरह इंतजाम करके केंद्र सरकार के एक हजार करोड़ रुपये जमा करा दिए हैं। अब अगले हफ्ते में धान की कैश क्रेडिट लिमिट जारी होने की उम्मीद है। धान की अधिकारिक खरीद एक अक्तूबर से शुरू हो रही है।
पिछले साल खरीद पर हुए वास्तविक खर्च और केंद्र द्वारा निर्धारित कीमतों में अंतर के चलते इस बार भी पंजाब सरकार पर केंद्र का एक हजार करोड़ रुपये बकाया हो गया था। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पंजाब सरकार को कहा था कि वह रकम जमा कराने के बाद ही धान की सीसीएल जारी की जाएगी।
पंजाब सरकार गंभीर संकट से जूझ रही है। अभी तक जीएसटी का हिस्सा भी नहीं आया है। लेकिन सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने वित्त विभाग को सख्त निर्देश दिए थे कि किसी भी हालत में एक हजार करोड़ का इंतजाम किया जाए। क्योंकि पहले ही किसान संगठनों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार केखिलाफ मोर्चा खोल रखा है। अ
गर खरीद में समस्या आई तो सरकार की मुश्किलें काफी बढ़ जाएंगी। जिसके बाद वित्त विभाग ने रकम का इंतजाम किया। सूत्रों के मुताबिक पूरी रकम एकमुश्त नहीं दी गई, बल्कि जैसे-जैसे पैसों का इंतजाम हुआ, रकम भेजी गई। बुधवार शाम तक अंतिम किस्त भी भेज दी गई है। अब सारा दारोमदार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया पर है।
आरबीआई केअधिकारियों के समक्ष पैरवी करने के लिए जल्द ही फूड सप्लाई विभाग की टीम मुंबई जाएगी। विभाग को उम्मीद है कि अगले सप्ताह केअंत तक सीसीएल जारी हो जाएगी। पंजाब में इस बार धान का बंपर उत्पादन हुआ है, 182 लाख टन धान खरीद की उम्मीद है। जिसके लिए 33250 करोड़ की सीसीएल का प्रस्ताव भेजा गया है। खरीद एक अक्तूबर से शुरू होगी।