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खुशखबरीः आईटी पार्क चंडीगढ़ में बनने वाले फ्लैट का डिजाइन हुआ तैयार, जल्द लॉन्च होगी स्कीम

Sat, 01 Feb 2020 10:38 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) जल्द ही आईटी पार्क में नई जनरल हाउसिंग स्कीम लांच करने जा रहा है। सीएचबी ने आईटी पार्क में लोगों के लिए बनने वाले फ्लैट्स के डिजाइन तैयार कर लिए हैं और जल्द ही अब प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को प्रेजेंटेशन दी जाएगी। प्रशासक की आखिरी मंजूरी मिलने के बाद स्कीम पर काम शुरू होगा।
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आईटी पार्क में दो तरह की स्कीमें लाईं जा रही हैं। एक शहरवासियों के लिए, जबकि दूसरी अफसरों के लिए। अफसरों के लिए बनने वाले लग्जरी फ्लैट्स के डिजाइन के लिए सीएचबी आर्किटेक्ट्स के बीच प्रतियोगिता करवा रहा है। इसमें सबसे अच्छी ड्राइंग को पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के अधिकारियों वाली एक कमेटी के समक्ष रखा जाएगा।

कमेटी की मंजूरी के बाद डिजाइन को फाइनल किया जाएगा। बोर्ड के मुताबिक वर्तमान कलेक्टर रेट के हिसाब से फ्लैट्स की कीमत पहले की स्कीमों के मुताबिक अधिक होगी। यहां पर ईडब्ल्यूएस, वन बेडरूम, टू बेडरूम और थ्री बेडरूम फ्लैट्स शामिल होंगे।
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ये सेवन स्टोरी फ्लैट्स होंगे, जिसमें जिम और स्वीमिंग पूल का निर्माण भी करवाया जाएगा। वर्ष 2015 में हाउसिंग बोर्ड को पार्श्वनाथ डेवलपर्स से 123 एकड़ भूमि वापस मिली थी, जिसके बाद से ही बोर्ड इसकी डेवलपमेंट के लिए लगा हुआ है।

पंजाब-हरियाणा सरकार खरीदेगी लग्जरी फ्लैट्स
आईटी पार्क में बनने वाले लग्जरी चार बेडरूम फ्लैट पंजाब और हरियाणा सरकार अपने विधायकों और अफसरों के लिए खरीदेगी। इसके लिए दोनों सरकारों की तरफ से चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को प्रस्ताव भेजा गया है, जिसे स्वीकार कर लिया है। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड आईटी पार्क में आठ टावर का निर्माण करने जा रहा है।

प्रत्येक टावर में 28 फ्लैट्स बनने हैं। यह सभी लग्जरी फ्लैट्स वीआईपी लोगों के लिए बनाए जाएंगे। इनमें आईएएस, आईपीएस अधिकारी व नेता रहेंगे। आईटी पार्क में ये फ्लैट्स खरीदने के लिए पंजाब सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और पीजीआई पहले ही इच्छा जता चुके हैं।

लग्जरी फ्लैट्स को लेकर गृह मंत्रालय से शिकायत
लग्जरी फ्लैट्स को लेकर वकील अजय जग्गा ने गृह मंत्रालय को शिकायत की है। वकील जग्गा ने प्रशासक वीपी सिंह बदनौर और एडवाइजर मनोज परिदा को भी शिकायत भेजी है। वकील अजय जग्गा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक जजमेंट का हवाला देते हुए कहा है कि किसी भी सरकारी संपत्ति, जिनमें जमीन भी आती है उसकी अलॉटमेंट नहीं की जा सकती है।

अगर सरकार सार्वजनिक भूमि को बेचना चाहती है तो उसे ओपन टेंडर, सार्वजनिक नीलामी द्वारा ही बेचा जा सकता है, ताकि सरकार को ज्यादा से ज्यादा राजस्व प्राप्त हो।
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