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राम रहीम के डेरे ने खोली, 'जाम-ए-इंसां' बनाने और पिलाने की असलियत

Sun, 10 Sep 2017 09:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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राम रहीम - फोटो : social media
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गुरमीत राम रहीम के डेरा सच्चा सौदा में पिलाए जाने वाले 'जाम-ए-इंसां' को लेकर कई तरह की बातें की जा रही हैं, इन्हें निराधार बताते हुए डेरा इसकी असलियत बता रहा है। डेरे की प्रवक्ता ने बताया कि 'जाम-ए-इंसां' की शुरुआत 29 अप्रैल 2007 को राम रहीम द्वारा की गई थी। यह उन्हें लोगों को पिलाया जाता है, जो राष्ट्र, धर्म और समाज की भलाई के लिए 47 नियमों को मानने का प्रण लेगा।
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अभी तक करोड़ों लोग इस जाम को पी चुके हैं।  डेरे की प्रवक्ता ने बताया कि जाम तैयार करने में जल, दूध एवं शर्बत ए रूह का इस्तेमाल किया जाता है। इसे लाखों लोगों के सामने खुले में ही तैयार किया जाता है। राम रहीम ही गुरु मंत्रों का जाप करके इसे तैयार करते हैं। इसे पहले राम रहीम स्वयं पीते हैं और उसके बाद नामदान ले चुके प्रेमियों को पिलाया जाता है। बता दें कि डेरा सच्चा सौदा में पिलाया जाने वाला 

 
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पीने के बाद न नींद आती थी, न सोचने समझने की शक्ति

Ram Rahim - फोटो : File Photo
पीजीआईएमएस के सूत्रों की मानें तो सिरसा स्थित ‘जाम’ डॉक्टरों पर भी भारी पड़ता था। इससे प्रदेश के डॉक्टरों के अलावा दिल्ली एम्स के डॉक्टर भी नहीं बच पाए। डेरा से डॉक्टरों में सबसे अधिक एम्स दिल्ली के डॉक्टर जुडे़ हैं। एक डॉक्टर की मानें तो डेरे में एक विशेष जाम पिलाया जाता था, उसमें कुछ तो होता ही था।

क्योंकि न पीने की इच्छा जताने पर भी जबरन वह जाम पिलाया जाता था। इसको पीने के बाद कई दिन तक न नींद आती है और न ही सोचने समझने की शक्ति सही रहती है। वशीकरण जैसा शब्द यदि कहीं सार्थक होता है तो वह डेरा ही है। क्योंकि वहां जाने वाले व्यक्ति को ऐसे वातावरण में रखा जाता था कि उसे सिर्फ गुरमीत ही दिखाई देता था। नये आदमी को तो वह उलझा कर रख देता है।

जाम पिलाने के बाद उसके अनुयायी घर तक पीछा करते थे और जूस वगैरह देने के बहाने मुलाकात करते रहते थे। बहुत कम होते हैं जो इन चीजों के बाद स्वयं को उससे बचा सके। इस अवधि में सिर्फ यही दिखाया जाता है कि यदि कोई भगवान है तो वही है। डॉक्टर ने हैरानी जताते हुए बताया कि डेरा के अस्पताल में हर जगह बाबा के गाने बजते थे। 
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