पंजाब सरकार द्वारा सूबे के सभी डेरों पर अपनी मर्जी के महंत लगाने की चिट्ठी सामने आने से संत समाज भड़क गया है। सरकार के इस फरमान के बाद इस चिट्ठी को वित्त कमिश्नर राजस्व एनएस कंग ने 4 मार्च को सभी डिप्टी कमिश्नरों और डिवीजनल कमिश्नरों को भेज दिया है। कई धार्मिक डेरे फरमान के खिलाफ लामबंद होने लगे हैं।
मामले को लेकर सोमवार को जालंधर में संत समाज की एक मीटिंग हुई। इस मीटिंग में संत निर्मल सिंह, संत हरकृष्ण सिंह सोढी और संत सरवन दास आदि पहुंचे। उन्होंने कहा कि इस फरमान से धार्मिक डेरों में सरकार का दखल बढ़ जाएगा। इसके साथ सदियों से चली आ रही गुरु-चेले की प्रथा भी खत्म हो जाएगी, क्योंकि सरकार डेरों पर अपनी मर्जी के महंत थोप देगी।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 15 दिन के अंदर इस चिट्ठी की स्थिति को साफ नहीं किया गया तो संत समाज इसके लिए संघर्ष का रास्ता अपनाएगा। उन्होंने कहा कि संत समाज सरकार के इस फरमान को नहीं मानेगा। प्रेस वार्ता कर संत समाज ने सरकार से मांग की कि इस बारे में जल्द से जल्द खुलकर स्थिति को साफ करना चाहिए ताकि संशय खत्म हो सके।
डीसी के पास होगी डेरों की कमान
चिट्ठी के अनुसार इन डेरों की कमान संबधित जिले के डीसी को सौंपी जाएगी और डीसी इन डेरों पर अपनी मर्जी से महंत लगा सकेंगे। इसके बाद डीसी को यह अधिकार होगा कि वह 3 माह बाद किसी भी डेरे से किसी भी मंहत को बदल दे।