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मैं शारीरिक संबंध बनाने के लिए फिट नहीं: डेरा प्रमुख

Tue, 11 Feb 2014 10:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
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सिरसा डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां ने साध्वियों से दुराचार के मामले में पंचकूला की विशेष अदालत में मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अपने बयान दर्ज कराए। उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी से दुराचार नहीं किया है और न ही इस केस की किसी पीड़ित को जानते हैं। शारीरिक संबंध बनाने के लिए वह 1990 के बाद से मेडिकली और फिजिकली फिट नहीं हैं। डेरा प्रमुख ने करीब 208 सवालों के जवाब दिए। सीआरपीसी की 313 (आरोपी की गवाही) के तहत यह उनकी आखिरी गवाही थी।
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सिरसा डेरा में यौन शोषण का आरोप

वर्ष 2002 में एक अज्ञात पत्र प्रधानमंत्री व हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के नाम आया था, जिसमें आरोप लगे थे कि सिरसा डेरा में यौन शोषण होता है। इसके बाद हाईकोर्ट से सिरसा के जिला एवं सत्र न्यायाधीश को जांच के आदेश हुए। तीन सितंबर 2002 को सेशन जज ने अपनी जांच रिपोर्ट दी, जिसमें शारीरिक शोषण की बात को नकारा नहीं गया। 24 सितंबर 2002 को सीबीआई जांच के आदेश हुए और सीबीआई ने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां पर केस दर्ज कर उन्हें आरोपी बनाया। इस केस में दो पीड़ित हैं और डेरा प्रमुख पर साध्वियों से दुराचार करने का आरोप है।

वीडियो कांफ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हो रहे हैं

पंचकूला स्थित हरियाणा की विशेष सीबीआई कोर्ट ने सीआरपीसी 313 के तहत बयान दर्ज कराने के लिए पर्सनली अपीयर होने के लिए कहा था, लेकिन स्थानीय पुलिस ने इसका विरोध किया। दलील दी कि इससे लॉ एंड ऑर्डर खराब हो सकता है। अदालत ने पुलिस की नहीं मानी। इसके बाद पुलिस हाईकोर्ट तक गई। वहां से फैसला पुलिस के हक में ही आया कि डेरा प्रमुख जैसे पहले वीडियो कांफ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हो रहे हैं, वैसे ही अब 313 के बयान दर्ज कराने के लिए भी वीडियो कांफ्रेंसिंग से ही बयान लिए जाएं।
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अगली सुनवाई 22 फरवरी को

सीआरपीसी की 313 (आरोपी की गवाही) के तहत सिरसा डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां की आखिरी गवाही थी। कोर्ट ने जब डेरा प्रमुख से सवाल किया कि गवाह उनके खिलाफ क्यों हैं? तो डेरा प्रमुख का जवाब था कि कुछ लोग डेरा के खिलाफ हैं, क्योंकि डेरा अच्छे एवं सामाजिक कार्य कर रहा है। उन्होंने नशा मुक्ति कराई है। नशा व शराब के खिलाफ प्रचार किया है। वेश्याओं का विवाह कराकर उनकी जिंदगी सुधारने का काम किया है। ड्रग माफिया व राजनीतिक पार्टियां उन्हें झूठे मामलों में फंसाकर बदनाम कर रही हैं। उन्होंने दुराचार केस में पीड़ित को पहचानने से भी इनकार किया। बचाव पक्ष की अन्य गवाहियों के लिए इस केस में अगली सुनवाई की तारीख 22 फरवरी को तय की गई है।
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