गुटबाजी के चलते पहले लोक सभा चुनाव में कांग्रेस हारी और अब यह गुटबाजी उप-चुनाव में भी भारी पड़ने वाली है। अक्तूबर में तलवंडी साबो और पटियाला शहरी सीटों पर उप चुनाव होने की उम्मीद है।
अकाली दल के तलवंडी साबो से कैंडिडेट ने कैंपेन भी शुरू कर दी है। पर कांग्रेस अभी तक हार के मंथन और आरोप-प्रत्यारोप से आगे नहीं बढ़ पाई है।
खाली हुई दोनों सीटों में से तलवंडी साबो तो कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है, क्योंकि यहां से कांग्रेस विधायक जीत महिंदर सिंह सिद्धू ने इस्तीफा देकर अकाली दल ज्वाइन किया था। अब सिद्धू को ही अकाली दल ने अपना उम्मीदवार बनाया है।
इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने तलवंडी साबो में विशाल संगत दर्शन किया। कई दिन वहीं डेरा डाल कर ग्रांटों के तोहफे बांटे। शिअद ने योजनाबद्ध तरीके से अपना प्रचार शुरू कर लीड ले ली है। उधर, कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व अपनी ही उलझनों में उलझा हुआ है।
टिकट के लिए अब तक चार दावेदार सामने आए हैं। जिनमें पूर्व विधायक हरमिंदर जस्सी अपने बेटे सनमीत सिंह के लिए टिकट मांग रहे हैं। अगर उसे नहीं मिलता है, तो वह खुद दावेदार हैं। पूर्व विधायक गुरप्रीत कांगड़ और बठिंडा देहाती प्रधान गुरा सिंह तुंगवाली भी दावेदारी जता रहे हैं।
पर प्रदेश नेतृत्व ने अभी तक उम्मीदवारी पर मंथन ही शुरू नहीं किया है। लोकसभा चुनाव में हार के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह गुट ने प्रदेश प्रधान प्रताप बाजवा के खिलाफ मोर्चा खोला था। कई दिनों तक इस्तीफे की मांग चली। फिर हाईकमान ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित कर दोनों गुटों को चुप करा दिया।
उसके बाद से बाजवा साइलेंट हैं और पार्टी कैडर निराश। उप चुनाव को लेकर अभी तक कांग्रेस में मंथन भी शुरू नहीं हुआ है। पार्टी हाईकमान का ध्यान भी फिलहाल उन राज्यों पर है, जहां विधानसभा चुनाव होने हैं। अगर हाल यही रहा तो उप चुनाव में भी कांग्रेस को निराश होना पड़ सकता है।