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पासपोर्ट जमा करना जमानत की सामान्य शर्त नहीं हो सकता: हाईकोर्ट

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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि जमानत देते समय पासपोर्ट जमा कराने की शर्त अदालतें नियमित रूप से नहीं लगा सकतीं। न्यायमूर्ति सुमित गोयल ने जमानत की शर्त को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार करते हुए यह निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट केवल यात्रा का दस्तावेज नहीं है, बल्कि पहचान और नागरिकता का महत्वपूर्ण प्रमाण भी है। अदालत ने कहा कि पासपोर्ट जमा कराने का आदेश, पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत इसे इम्पाउंड करने के समान नहीं है। पासपोर्ट को जब्त या इम्पाउंड करने का अधिकार केवल पासपोर्ट प्राधिकरण का है, न कि अदालत का। जस्टिस गोयल ने कहा कि यह शर्त केवल तब लगाई जानी चाहिए जब आरोपी के फरार होने या न्याय प्रक्रिया में बाधा डालने का वास्तविक और तात्कालिक खतरा हो। इसे स्वचालित या यांत्रिक ढंग से लागू नहीं किया जा सकता।
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यह याचिका 22 नवंबर 2019 के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें जालंधर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने एक आपराधिक मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत दी थी और पासपोर्ट जमा करने की शर्त लगाई थी। आरोपियों ने दावा किया कि वे 2019 से जमानत पर हैं और कभी शर्तों का उल्लंघन नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि जमानत की शर्तें अनुपातिक होनी चाहिए और इतनी कठोर या दमनकारी नहीं होनी चाहिए कि जमानत का अधिकार ही बेअर्थ हो जाए। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि विदेश यात्रा से पहले ट्रायल कोर्ट की अनुमति लें। ब्यूरो
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