जेल में कैदियों के बीच रिसर्च, एनालिसिस एंड इंटेलिजेंस विंग स्थापित किया गया है जिसके जरिये कैदियों के बीच से सूचनाएं एकत्रित कर नशे के कारोबार व मोबाइल फोन के इस्तेमाल से गैर-कानूनी गतिविधियों को रोका जा सके।
जेल के बाहर से भीतर आपत्तिजनक वस्तुएं न आ सकें इसके लिए सीआरपीएफ की एक अतिरिक्त कंपनी केंद्र से मांगने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही जेल के स्टाफ द्वारा यदि मोबाइल फोन को जब्त करवाया जाता है तो उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए पारितोषिक देने का भी प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही बाहरी दीवारों की निगरानी के लिए चार लोगों की क्षमता वाले 16 ई-व्हीकल व 57 ई-बाइक तैनात की जाएंगी।
जेल के भीतर नशे का नेटवर्क तोड़ने व जेल में रहकर वहां से प्रदेश में गैर-कानूनी गतिविधियों को अंजाम देने वालों पर नकेल कसने के लिए राज्य सरकार की एजेंसियां एनआईए व अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिल कर काम कर रही है। आपस के सामंजस्य को स्थापित रखने के लिए हर तीन माह में एक बैठक आयोजित की जाती है।