चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में ओबीसी आरक्षण क्रियान्वयन मंच ने सोमवार को विरोध प्रदर्शन किया। इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए दाखिलों और फैकल्टी भर्तियों में संविधान की ओर से अनिवार्य 27 प्रतिशत आरक्षण को तात्कालिक रूप से लागू करने की मांग की गई। यह प्रदर्शन राजनीतिक छात्र संगठनों, नेताओं और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों ने किया। आम आदमी पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन ने इसे समर्थन दिया। एनएसयूआई नेता जतिंदर विरक, पीयूसीएससी के उपाध्यक्ष अर्चित गर्ग और मंझोत सिंह ने समर्थन की घोषणा करते हुए कहा कि एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी के नेतृत्व में आगे और भी कठोर कदम उठाए जाएंगे।
प्रमुख वक्ताओं गुरदीप सिंह एएसएफ, संदीप कुमार एसएफएस, शिंदरपाल सिंह पंजाब नेशनल पार्टी, गुरमेल सिंह सीटीआ पीजीआई, सुनील पारखी, अरुण कुमार ने 2008 से अब तक पीयू प्रशासन के ओबीसी आरक्षण से इन्कार करने की निंदा की। उन्होंने पूर्व वीसी प्रो. आरसी सोबती, प्रो. अरुण ग्रोवर, प्रो. राजकुमार और वर्तमान वीसी प्रो. रेनू विग के साथ-साथ पूर्व रजिस्ट्रारों पर ओबीसी समुदाय के खिलाफ साजिश का आरोप लगाया। प्रदर्शन में विजय पाल यादव, एलआर बुदानिया, गुज्जर समाज के नेता मेलू राम और चोकर, बैरागी समाज के महासचिव बैरागी और ओबीसी फेडरेशन के बलविंदर सिंह सुलतानी और एडवोकेट गुरमेल सिंह ने भी भाग लिया। इन्होंने तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की।
पीयू शिक्षक डॉ. कुलविंदर सिंह, डॉ. सुधीर मेहरा और डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि आरक्षण से लगातार इनकार करना संविधानिक गारंटी और सामाजिक न्याय का उल्लंघन है। यूनियन अध्यक्ष बलविंदर सिंह मुलतानी ने कहा कि हम ओबीसी वर्ग को उनके अधिकार से वंचित नहीं रहने देंगे। सुनील पारखी ने पीयू को बड़े आंदोलन की चेतावनी दी। विजयपाल सिंह, गुरमेल सिंह सहित अन्य ने कहा कि अगर उनकी मांगें तुरंत नहीं मानी गईं तो पंजाब और चंडीगढ़ में आंदोलन विशाल जन अभियान में बदल जाएगा।