इमारत की तीन मंजिल पहले ही ध्वस्त हो चुकी थीं। गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब नारोवाल जिले में ही है। इस मामले में विभाजन के बाद सभी ऐतिहासिक और धार्मिक इमारतों का रखरखाव करने वाले औकाफ बोर्ड ने कोई भी प्रतिक्रिया नहीं जारी की है।
दीवारों पर बने थे श्री गुरु नानक देव जी के चित्र
इस इमारत के निर्माण में पुरानी ईंटें, रेत, मिट्टी और चूना पत्थर का प्रयोग किया गया था। इस इमारत में 16 बड़े कमरे थे जिनका निर्माण चौड़ी दीवारों पर किया गया था। इसमें लकड़ी के दरवाजे लगे थे और दरवाजों पर फूलों की नक्काशी की गई थी। इमारत के आसपास की तीन फुट चौड़ी और मजबूत दीवारें खूबसूरत डिजाइनों में छोटी पुरानी ईंटों से बनी थीं और इस पर सिख धर्म के संस्थापक बाबा श्री गुरु नानक देव जी के चित्र बने हुए थे।
इस इमारत में कई हिंदू शासकों और राजकुमारों के इतिहास के बारे में भित्ति चित्रकला के माध्यम से जानकारी दी गई थी। सूत्रों के अनुसार स्थानीय लोगों के एक समूह ने औकाफ विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से कथित तौर पर इस इमारत को आंशिक रूप से ध्वस्त कर देने का आरोप भी लगाया है। इस इमारत की कीमती खिड़कियां, दरवाजे और रोशनदान भी बेच दिए गए।
पाकिस्तान के नारोवाल में गुरु नानक महल को गिराया जाना निंदनीय है। एक तरफ सिख जगत श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व की तैयारी कर रहा है। दूसरी तरफ पाकिस्तान सरकार गुरु साहिब से संबंधित ऐतिहासिक इमारत को जमींदोज कर रही है। पाकिस्तान सरकार गुरु साहिबान के समय की यादगारों को संभालने में लापरवाही कर रही है। इस संदर्भ में पाकिस्तान के पीएम इमरान खान और अकाफ बोर्ड को पत्र लिखेंगे। -भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल, एसजीपीसी अध्यक्ष