सहमति संबंध में रहने वाले प्रेमी जोड़ों को सुरक्षा देने और प्रेमी जोड़े में एक के पहले से शादीशुदा होने की स्थिति में क्या सुरक्षा दी जा सकती है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के इन दोनों विषयों पर अलग-अलग बेंच के अलग आदेश से विकट स्थिति पैदा हो गई है। जस्टिस अनिल खेत्रपाल ने इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए बड़ी बेंच का गठन करने के लिए मामला मुख्य न्यायाधीश को रेफर कर दिया है।
मामला हरियाणा के फरीदाबाद निवासी यशपाल की याचिका से जुड़ा है। यशपाल ने बताया कि वह एक लड़की से प्रेम करता है और उसके साथ सहमति संबंध में रह रहा है। उसका पत्नी से रिश्ता अच्छा नहीं है हालांकि अभी तक उसने तलाक नहीं लिया है। हाईकोर्ट के समक्ष ऐसे 3 मामले रखे गए, जिनमें कोर्ट ने ऐसे जोड़े को सुरक्षा से इनकार कर दिया था। साथ ही एक मामला ऐसा भी आया जहां प्रेमी जोड़े को विवाहित होने के बावजूद सुरक्षा दी गई।
साथ ही सहमति संबंध में रह रहे प्रेमी जोड़ों की सुरक्षा याचिका खारिज करने के 4 मामले न्यायालय के समक्ष रखे गए और ऐसे 4 मामले रखे गए जहां सहमति संबंध में सुरक्षा दी गई। हाईकोर्ट ने कहा कि अलग-अलग फैसलों से कानून की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। ऐसे में इस मामले को बड़ी बेंच को रेफर करना चाहिए ताकि ऐसे मामलों का जल्द निपटारा हो सके और सभी एकमत हों।
यह दो सवाल उठाए गए
बड़ी बेंच को केस रेफर करते हुए जस्टिस अनिल खेत्रपाल ने सवाल उठाया कि क्या प्रेमी जोड़े को सुरक्षा देते हुए उनका वैवाहिक स्तर देखना जरूरी है? यदि नहीं तो ऐसी क्या स्थिति होगी जिसमें याचिका को खारिज किया जा सकता है। दूसरा सवाल उठाया कि क्या प्रेमी जोड़े को जो सहमति संबंध में रह रहा है उसे सुरक्षा से इनकार किया जा सकता है। इन दोनों सवालों के जवाब के लिए अब मुख्य न्यायाधीश को बड़ी बेंच का गठन करना है ताकि इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट हो सके।