पंजाब के सरसों के साग के बाद हरियाणा का सरसों का शहद विदेशियों को खूब भा रहा है। सात समंदर पार अमेरिका में सरसों के शहद क्रीम हनी की मांग बढ़ रही है। हरियाणा के मधुमक्खी पालक क्रीम हनी का निर्यात काफी समय से अमेरिका को कर रहे हैं, लेकिन बीते दो-तीन सालों में न सिर्फ इसके निर्यात में इजाफा हुआ है, बल्कि दाम भी ऊंचा मिल रहा है।
हरियाणा के व्यापारी और निर्यातक पहले के मुकाबले 500 से 1,000 टन अतिरिक्त क्रीम हनी का निर्यात कर रहे हैं। इसके निर्यात में व्यापारी और निर्यातकों को भी काफी फायदा हो रहा है। मधुमक्खी पालकों से 80 रुपये तक प्रति किलोग्राम सरसों का शहद लेने के बाद व्यापारी इसे जहां डेढ़ से दोगुने दाम में निर्यातक को बेचता है, वहीं निर्यातक इसे कई गुना ऊंची कीमत पर अमेरिका को निर्यात करता है।
हरियाणा में सरसों का रकबा काफी ज्यादा है, इसलिए मधुमक्खी पालक इसके शहद का बड़ी मात्रा में उत्पादन करते हैं। सरसों के सीजन में उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश व हिमाचल प्रदेश के मधुमक्खी पालक भी यहां आकर मधुमक्खियों के डिब्बे रखते हैं। क्रीम हनी की खूबी है कि वह जम जाता है। देश में इसकी खपत कम होने का कारण इसके पीछे यह धारणा है कि शुद्ध न होने के कारण ही यह जमता है। अमेरिकी विशेषज्ञों ने जमे हुए शहद को पूरी तरह शुद्ध माना है, जिससे वहां क्रीम हनी की खपत बढ़ रही है।
स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है शहद
विनय फौगाट बताते हैं कि शहद व पराग कण लाल रक्त कणों की संख्या बढ़ाते हैं। इससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है। थकान बिल्कुल महसूस नहीं होती। पराग कण स्पर्म की मात्रा में भी बढ़ोतरी करते हैं। बच्चा न होने की स्थिति में पराग कण महिलाओं के लिए काफी लाभदायक हैं। रॉयल जैली से भी उम्र बढ़ती है।