शिक्षकों की पदोन्नतियां काफी समय से अटकी हुई थीं, जिन्हें अब मंजूरी मिली है। रोस्टर लागू न होना, शिक्षकों की तैनाती न होना, विभागों का विलय आदि कार्य अटका हुआ है। इसका असर रैंकिंग पर भी पड़ेगा। सीनेट के न होने से फैसले एकतरफा होने का अंदेशा होता है। इसको लेकर पूर्व सीनेटरों ने आरोप भी लगाए हैं। बड़े वित्तीय कार्यों को लेकर भी मनमाने फैसलों की आशंका रहती है। पारदर्शिता नहीं बनी रहती। ऐसे में सीनेट का होना जरूरी माना जा रहा है।
शासन सुधार का इंतजार तो नहीं
पीयू शासन सुधार के लिए उच्चस्तरीय कमेटी बनाई गई थी। उन्होंने अपनी सिफारिशें चांसलर को भेज दीं। सूत्रों का कहना है कि चांसलर कार्यालय की ओर से शासन सुधार के जो आदेश आएंगे उसके मुताबिक पीयू चुनाव करवाएगी। हालांकि पीयू ने यह साफ नहीं किया है। यदि शासन सुधार होता है तो फिर बड़े पैमाने पर बदलाव होंगे। उन सुधारों के जरिए चुनाव की प्रक्रिया सिमट जाएगी।
हालात कुछ सामान्य... करवाए जा सकते हैं चुनाव
पीयू का संचालन सीनेट के जरिए होता है। ऐसे में सीनेट का चुनाव अब करवाया जा सकता है। हालात कुछ सामान्य हैं अन्यथा कोरोना की तीसरी लहर भी आ सकती है। पीयू को चुनाव की प्रक्रिया अब जल्द शुरू कर देनी चाहिए। - प्रो. रोनकी राम
जल्द से जल्द चुनाव हों
पीयू सीनेट चुनाव काफी पहले ही हो जाने चाहिए थे। कई बार मौके मिले थे लेकिन इच्छाशक्ति जागृत नहीं हुई। अब कोरोना की दूसरी लहर खत्म हो गई। पीयू जल्द से जल्द चुनाव करवाए ताकि कार्य प्रभावित न हो सकें। - डीपीएस रंधावा
सीनेट है पुरानी व्यवस्था
पीयू में सीनेट का होना जरूरी है। यह पुरानी व्यवस्था है। इस समय चुनाव आसानी से करवाए जा सकते हैं। पीयू को इसकी प्रक्रिया बिना देरी के शुरू करनी चाहिए। सीनेट चुनकर आएगी तो अन्य मुद्दे हल हो सकेंगे। - डॉ. अजय रंगा
सीनेट चुनाव का मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। जैसे ही वहां से निर्णय आएगा उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - रेनुका बी सलवान, डीपीआर पीयू।