चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के पर्यावरण विभाग की टीम ने पीजीआई के सामुदायिक चिकित्सा विभाग और आईआईटी दिल्ली के सहयोग से दिल्ली में प्रदूषण पर शोध किया है। इसमें पाया गया है कि दिल्ली में सुबह और शाम को ट्रैफिक के कारण अत्यधिक प्रदूषण होता है और हवा खतरनाक होती है। इस शोध में राष्ट्रीय वायुमंडलीय अनुसंधान प्रयोगशाला का भी सहयोग रहा है। शोध का विषय दिल्ली में प्रति घंटा यातायात उत्सर्जन पर भीड़-भाड़ का प्रभाव था।
सांस की बीमारियों वाले व्यक्तियों के लिए गंभीर हो सकते हैं प्रभाव
रिपोर्ट में पाया गया कि सड़क यातायात की भीड़ का पर्यावरण और दैनिक जीवन दोनों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। दूसरी तरफ यह उत्सर्जन को बढ़ाता है, क्योंकि वाहनों को निष्क्रिय होने या धीमी गति से चलने के लिए मजबूर किया जाता है, जो हवा की गुणवत्ता को कम करने का करण बनता है। इससे सांस की बीमारियों वाले व्यक्तियों के लिए गंभीर स्वास्थ्य प्रभाव हो सकते हैं। दिल्ली में यातायात की बढ़ती भीड़ के प्राथमिक कारणों में एक शहर की जनसंख्या में तेजी से वृद्धि है। क्षेत्र में रहने और काम करने वाले अधिक लोगों के साथ, सड़कों पर वाहनों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे आने-जाने में अधिक समय लगता है।
ट्रैफिक जाम सबसे बड़ा कारण
दिल्ली में ट्रैफिक की भीड़ बढ़ने का एक अन्य कारण बुनियादी ढांचे के विकास की कमी है। शोध में आईआईटी दिल्ली के ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च एंड इंजरी प्रिवेंशन प्रोग्राम (टीआरआईपीपी) वर्गीकृत ट्रैफिक डाटासेट का उपयोग किया गया है। इससे दिन के प्रत्येक घंटे के लिए दिल्ली में यातायात उत्सर्जन के हॉटस्पॉट की पहचान करने के लिए ठीक ग्रिड रेजोल्यूशन पर जहरीले प्रदूषकों के प्रति घंटे उत्सर्जन का अनुमान लगाया जा सके। अध्ययन में पाया गया है कि सुबह और शाम के व्यस्त घंटों में उत्सर्जन अधिक होता है। इन घंटों के दौरान, ट्रैफिक जाम के प्रभाव से कम वाहन गति के कारण यातायात से संबंधित उत्सर्जन अधिक होता है। इस शोध में पर्यावरण विभाग के पीएचडी शोधार्थी आकाश बिस्वाल, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुमन मोर, पीजीआई के प्रोफेसर रवींद्र खैवाल, विकास सिंह इत्यादि शामिल हैं।