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दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर को हाईकोर्ट से मिलती बड़ी राहत, जानिए क्या था मामला

Wed, 20 Mar 2019 10:03 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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प्रसिद्ध टिप्पणीकार और दिल्ली यूनिवर्सिटी में हिंदी के प्रोफेसर अपूर्वानंद को एक समुदाय पर टिप्पणी करने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। उनके खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर पर आगे किसी भी कार्रवाई पर रोक लग गई है। साथ ही हरियाणा सरकार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के आदेश दिए गए हैं।
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प्रो. अपूर्वानंद की ओर से सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने हाईकोर्ट में बहस के दौरान तर्क दिया कि यमुनानगर निवासी एक व्यक्ति की शिकायत के आधार पर बिना तथ्यों को समझे याची के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई। शिकायतकर्ता स्वयं एक हिंदू है और उसने आरोप लगाया था कि एक बड़े समाचार पत्र में याची ने जो कॉलम लिखा था, उस कॉलम में एक समुदाय  के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी।

शिकायतकर्ता के अनुसार, यह लेख समाज में वैमनस्य और विभाजन पैदा करने वाला था, जिसके चलते उस समुदाय के दोस्तों ने उससे बोलना बंद कर दिया है। मामले मे दर्ज एफआईआर में उस अखबार के संपादक को भी नामित किया गया था। मजिस्ट्रेट ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए थे। इसके बाद यमुनानगर की सेशन कोर्ट से दोनों को अग्रिम जमानत मिल गई थी।
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जमानत देते हुए जज ने ये बात कही

अग्रिम जमानत देते हुए जज ने कहा था कि पूरे लेख को यदि संयुक्त पढ़ा जाए तो ऐसा नहीं लगता कि इसमें कोई ऐसी बात किसी उद्देश्य से लिखी गई है या यह लेख अव्यवस्था पैदा करने व लोगों को हिंसा के लिए उकसाने वाला हो। बल्कि यह गुजरात में राजनीतिक पार्टी की कार्यप्रणाली से जुड़ा है।

याची के वकीन अनुपम गुप्ता ने कहा कि प्रोफेसर अपूर्वानंद हमेशा से धर्म निरपेक्षता के समर्थक रहे हैं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों व सांप्रदायिक सद्भाव को लेख लिखते समय लक्षित करते हैं। इस प्रकार की शिकायतों से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाई जा रही है।

मजिस्ट्रेट ने कानूनी पक्षों पर गौर नहीं किया
यह भी तर्क दिया गया कि मजिस्ट्रेट ने शिकायत के कानूनी पक्षों पर गौर किए बिना एफआईआर के आदेश जारी कर दिए। याचिकाकर्ता ने एफआईआर रद्द करने की तथा याचिका लंबित रहते एफआईआर के आधार पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगाने की अपील की थी। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता का पक्ष सुनने के बाद हरियाणा सरकार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही एफआईआर के आधार पर कोई भी कार्रवाई करने पर रोक लगा दी है।
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