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लोकसभा चुनाव 2019: हरियाणा में विपक्ष में फूट से फ्रंट फुट पर आई भाजपा, जातीय समीकरण बिगड़ेंगे

Wed, 20 Mar 2019 09:46 AM IST
खुशबू गोयल प्रवीण पांडेय/अमर उजाला, चंडीगढ़
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सीएम मनोहर लाल, भूपेंद्र सिंह हुड्डा - फोटो : फाइल फोटो
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हरियाणा में सियासी उठापटक के बीच भाजपा फ्रंट फुट पर चुनावी दंगल खेलने के लिए तैयार है। विपक्षी दलों में फूट को देखते हुए सत्ताधारी दल दसों सीटों पर कब्जे के इरादे से मैदान में उतर रही है। जींद उपचुनाव के नतीजों से भाजपा उत्साहित है। रोहतक और हिसार ऐसी सीटें हैं, जिन पर भाजपा आलाकमान की सीधी नजर है।
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रोहतक से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा सांसद हैं। 2014 में मोदी लहर के बावजूद दीपेंद्र ने सीट बचा ली थी। दूसरी ओर, इंडियन नेशनल लोकदल विभाजित हो चुकी है। इनेलो से निष्कासित हिसार सांसद दुष्यंत चौटाला ने जननायक जनता पार्टी बना ली है।

कांग्रेस के चुनावी चेहरे साफ नहीं हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव लड़ने के इरादे से बैठे धुरंधरों को भी लोकसभा में जोर आजमाना होगा। वहीं, इनेलो चाचा-भतीजा विवाद में उलझी है। ओमप्रकाश चौटाला, बड़े बेटे अजय के साथ शिक्षक भर्ती घोटाले में 10 साल की सजा काट रहे हैं। छोटे बेटे अभय इनेलों के सर्वेसर्वा हैं।
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अजय के बड़े बेटे दुष्यंत ने चाचा अभय से विवाद के बाद जजपा का गठन किया। दुष्यंत के छोटे भाई दिग्विजय ने जींद उपचुनाव में जींद प्रत्याशी के तौर पर अच्छा प्रदर्शन किया।

भाजपा और कांग्रेस की बड़ी चुनौती

कांग्रेस के लिए गुटबाजी सबसे बड़ी चुनौती है। जाट-गैर जाट में भाजपा के मुकाबले का चेहरा नहीं है। टिकट बांटना और भितरघात कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए मुश्किल खड़ी करने वाले हैं। संगठन भाजपा का मजबूत है। वहीं कांग्रेस में पांच साल से जिला व ब्लॉक अध्यक्ष नहीं बन पाए। इनेलो नए सिरे से पांव जमा रही है, दुष्यंत और दिग्विजय की जजपा के बढ़ते जनाधार से खतरा है।

रोहगार अहम मुद्दा
प्रदेश में इस बार लगभग 15 लाख से अधिक युवा पहली बार वोट डालेंगे, जो पिछले चुनाव से चार लाख ज्यादा है। युवाओं के लिए रोजगार और बेरोजगारी अहम मुद्दे हैं। सोशल मीडिया से भी युवा मतदाता अपना रुख तय करते हैं।

सुरक्षित सीट गंवाई
प्रदेश की दस लोकसभा सीटों में से दो आरक्षित हैं। 2014 में अंबाला सीट भाजपा ने और सिरसा इनेलो ने जीती थी। दोनों जगहों पर पहले कांग्रेसी सांसद थे, लेकिन सत्ता विरोधी लहर में कांग्रेस दोनों सीटें हार गईं।

आयातित प्रत्याशियों से भी गुरेज नहीं
भाजपा दूसरे दलों से आए नेताओं को भी टिकट देगी। दो दिन पूर्व पार्टी में शामिल अरविंद शर्मा इसका ताजा उदाहरण हैं। आगे भी भाजपा दूसरों दलों से आने वाले नेताओं को गले लगाने से भी हिचकेंगी नहीं।
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जातीय समीकरण पर असर डालेंगे नए दल

हरियाणा में नवगठित पाटियां गठबंधन कर रही हैं, इससे जातीय समीकरणों पर असर पड़ना तय है। भाजपा के बागी सांसद राजकुमार सैनी की लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी, लोसुपा ने बसपा के साथ गठबंधन कर लिया है। जजपा और आप साथ आ रहे हैं। कांग्रेस शहरों के साथ ही गांवों में भी है, लेकिन ओबीसी वोट बैंक छिटका है। भाजपा और लोसुपा के साथ यह वोट बैंक जुड़ गया है।

भाजपा का शहरों में खासा जनाधार है, लेकिन जींद उपचुनाव में पार्टी ने ग्रामीण मतों में भी सेंध लगाई है। खट्टर राज में पार्टी ने ग्रामीण विकास पर खासा फोकस किया है। इनेलो ग्रामीण पार्टी है, जाट मतदाता कांग्रेस की ताकत हैं, लेकिन इनेलो और भाजपा उसमें सेधमारी करके समीकरण बिगाड़ सकते हैं। भाजपा गैर जाट मतदाताओं की पहली पसंद है, तो जाट नेताओं के अपने रसूख के कारण भी पार्टी को फायदा है।

शहरों में इनेलो का जनाधार कम है। आप और जजपा का गठबंधन जाट व गैर जाट का गठबंधन बनकर भाजपा को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि जनता का भाजपा की तरफ झुकाव भी है।
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