काली बेईं पहुंचा जापानी प्रतिनिधिमंडल।
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जापान के 31 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने श्री गुरु नानक देव जी के चरण स्पर्श बेईं के दर्शन किए और इसके इतिहास के बारे में जानकारी हासिल की। जब जापानी प्रतिनिधिमंडल को इस ऐतिहासिक स्थल पर 23 साल पहले बड़े पैमाने पर प्रदूषण के बारे में पता चला तो वे हैरान रह गए।
प्रतिनिधिमंडल इस बात से भी आश्चर्यचकित था कि कैसे पंजाब के लोगों ने मृत नदी को पुनर्जीवित किया और पंजाब में पर्यावरण के बारे में एक बड़ी जागरूकता पैदा की। प्रतिनिधिमंडल ने पवित्र बेईं किनारे चार घंटे तक रुककर सिख इतिहास, निर्मला पंथ और पानी के प्राकृतिक स्रोतों के बारे में जानकारी हासिल की। जापानी प्रतिनिधिमंडल में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं।
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इतिहास की जानकारी रखने वाले जापानी प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि जापान अगस्त के महीने को कभी नहीं भूल सकता क्योंकि उसके दो बड़े शहरों नागासाकी और हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराए गए थे। इन बमों ने भारी तबाही मचाई।
उन्होंने कहा कि बाबा नानक की धरती सुल्तानपुर लोधी आकर उन्हें खुशी हो रही है कि यहीं से पूरी दुनिया को सबकी भलाई का संदेश दिया गया। पंजाब उसी संदेश का पालन कर रहा है। प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए संत सुखजीत सिंह ने कहा कि पंजाब में बाढ़ से भारी तबाही हुई है। इसीलिए पर्यावरणविद् और राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल बाढ़ के दौरान टूटे बांधों की मरम्मत में दिन-रात लगे हुए हैं।
बेईं के किनारे किया पाठ और कीर्तन
योगी अमनदीप सिंह के नेतृत्व में यह जत्था निर्मल कुटिया सुल्तानपुर लोधी पहुंचा। यहां उन्होंने बेईं के किनारे पर पाठ और कीर्तन किया। इसके बाद योगी अमनदीप ने समूह को बेईं के इतिहास और संत बलबीर सिंह सीचेवाल द्वारा किए जा रहे कार्यों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने संत सीचेवाल जी का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके द्वारा किए गए प्रकृति संरक्षण से यहां आकर आध्यात्मिकता का अनुभव होता है। इसके बाद आए हुए समूह को सम्मानित किया गया। इस समूह ने पवित्र बेईं के दर्शन से पहले गुरुद्वारा श्री बेर साहिब में भी माथा टेका। इस समूह में इजुमी यानोगिमोटो, मेगनिमी मुरामात्सु, मिनामी उताके, चिसा त्सुमागिमा, मेसाई नाबेटा और मंसूरी सोगाहारा शामिल थे। इस मौके पर सुरजीत सिंह शंटी, दिलराज कौर, बलदेव सिंह, निधि कौर आदि मौजूद थे।