पटियाला से कांग्रेस प्रत्याशी और विदेश राज्यमंत्री परनीत कौर के विजय रथ को रोकने के लिए शिअद ने इस बार कभी परनीत के करीबी रहे दीपइंदर सिंह ढिल्लों को मैदान में उतारा है। ढिल्लों अपने चुनाव प्रचार में केंद्र सरकार की नाकामी समेत घग्गर दरिया का मुद्दा जोरशोर से उठा रहे हैं।
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उनका कहना है कि परनीत जीतने के बाद वापस मुड़कर अपने क्षेत्र में नहीं आती हैं। सुबह उठते ही ढिल्लों काफिले संग चुनाव प्रचार के लिए निकल पड़ते हैं। चुनाव प्रचार के दौरान नरेश बातिश ने दीपइंदर सिंह ढिल्लों से उनकी रणनीति और मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश।
परनीत कौर से जंग पर ये बोले
सवाल- तीन बार की विजेता परनीत कौर के साथ जंग होना कैसा महसूस होता है?
जवाब- परनीत कौर तीन बार की विजेता जरूर रही हैं लेकिन वह अपने तक ही सीमित रही हैं। बीते पंद्रह सालों में उन्होंने वोटरों की सुध नहीं ली।
जनता का यही कहना है कि परनीत कौर ने तो जीतने के बाद उनके बारे में कभी सोचा नहीं हैं। मैं तो वोटरों के साथ ही खड़ा हूं। जीत मिलती है तो उनकी मुझसे जो भी अपेक्षाएं हैं उन्हें पूरा करने की पूरी कोशिश करूंगा।
कांग्रेस में बारे में ऐसा कहा
सवाल- आप कांग्रेस में रहे हैं तो पार्टी की नीतियों से अच्छी तरह वाकिफ होंगे? जवाब- हां, मुझे पता है कि कांग्रेस चुनाव प्रचार में किस तरह की नीतियां लेकर चलती हैं। मैं कांग्रेस की नीतियों को अच्छी तरह समझता हूं। अच्छी तरह मतलब मुझे पता है कि कांग्रेस चुनाव प्रचार में क्या हथकंडे अपनाती है।
मैं कांग्रेस की नीतियों को सफल नहीं होने दूंगा। मैं हर गांव, हर वार्ड में जा रहा हूं। लोग मुझसे जुड़ रहे हैं। कांग्रेस भले ही कितना भी वोटरों पर दबाव बना ले, लोग शिरोमणि अकाली दल व भाजपा के साथ जुड़ रहे हैं। लिहाजा हमारा कुनबा बढ़ रहा है।
गायब होते राष्ट्रीय मुद्दों पर ये कहा
सवाल- इस बार के लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दे गायब हो रहे हैं? जवाब- राष्ट्रीय मुद्दों के साथ स्थानीय मुद्दे भी जरूरी हैं। इसलिए इन मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पटियाला में घग्गर दरिया का मुद्दा अहम है। बाढ़ का खतरा पूरे शहर पर रहता है तो इस मुद्दे को उठाना जरूरी है।
लंबे समय से घग्गर पटियाला वासियों के लिए समस्या बनी हुई है। इस समस्या को हल करना करवाना मेरी प्राथमिकता होगी। शहर का विकास करवाना केंद्रीय मुद्दों के साथ ही जुड़ा हुआ है।
निजी जिम्मेदारी के बारे में ये है विचार
सवाल- चुनाव में निजी हमले कहां तक जायज हैं? जवाब- देश में लोकसभा चुनाव आम तौर पर पांच साल बाद ही होते हैं। परनीत कौर पंद्रह साल से सांसद हैं। इन पंद्रह सालों में उन्होंने अपने शहर के विकास के लिए कुछ नहीं किया।
केंद्रीय मंत्री होने के बावजूद इलाके के लिए कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं ला पाईं। अब इस तरह की स्थिति में तो उनकी निजी तौर पर ही जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
शिअद को लेकर ये सब कहा
सवाल- आप शिअद के लिए वोट मांग रहे हैं या मोदी के लिए? जवाब- देश में नरेंद्र मोदी की लहर चल रही है। सभी सर्वे के मुताबिक नरेंद्र मोदी सबसे लोकप्रिय नेता हैं। यही नहीं सर्वे में तो यह बात भी सामने आ चुकी है कि एनडीए की सरकार बनने जा रही है। शिअद एनडीए का ही एक हिस्सा है।
केंद्र में एनडीए विकास करेगी और पंजाब में शिअद विकास कर रही है। इसलिये वोट दोनों तरफ ही विकास के लिये मांगे जा रहे हैं। वोट नरेंद्र मोदी को मिले या शिअद को बात एक ही है। विकास तो देश का ही होगा।
नशे के व्यापार पर ऐसे है विचार
सवाल- कांग्रेस का आरोप है कि शिअद पंजाब में नशा फैला रहा है? जवाब- झूठा आरोप लगाता कांग्रेस की फितरत रही है। जो भी व्यक्ति पंजाब में अपराध कर रहा है सरकार की तरफ से उसे सजा दी जा रही है। शिरोमणि अकाली दल हमेशा से ही नशे के खिलाफ है। कानून अपना काम कर रहा है।
सवाल- आम आदमी पार्टी का क्या असर पड़ेगा? जवाब- देश में हर तरह का वोटर है। हर वोटर की अपनी सोच है। जो लोग लंबे समय से शिरोमणि अकाली दल एवं भाजपा के साथ जुड़े हैं वे आम आदमी पार्टी की तरफ नहीं जाएंगे।
कारण है कि इन पार्टियों के वोटरों को पता है कि आम आदमी पार्टी की सरकार तो आनी नहीं। इसलिए इनको वोट डालने का मतलब है वोट खराब करना। समझदार वोटर तो इन्हें वोट डालकर अपना वोट खराब नहीं करेंगे।