भाजपा के मंच पर दीपेंद्र ने दिखाए तेवर
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रोहतक-जींद रेल ट्रैक पर इलेक्ट्रिक ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के कार्यक्रम में पहुंचे कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने प्रोजेक्ट को अपना बताकर श्रेय लिया। काफी संख्या में समर्थकों के साथ कार्यक्रम में देरी से पहुंचे दीपेंद्र ने रेलमंत्री से कहा कि प्रभु जी यह तो हमारा प्रोजेक्ट था। भाजपा ने तो उसे केवल पूरा किया है। उन्होंने यह शिकायत भी कि यूपीए के कार्यकाल में स्वीकृत योजनाओं को भाजपा के शासनकाल में या तो पूरा नहीं किया जा रहा है या उनका स्वरूप बदल दिया जा रहा है।
कार्यक्रम में सांसद दीपेंद्र हुड्डा जैसे ही मंच पर पहुंचे मंच संचालक ने उन्हें संबोधन के लिए आमंत्रित कर दिया। अपने करीब 20 मिनट के भाषण में सांसद ने कहा कि रोहतक-जींद-बठिंडा लाइन के विद्युतीकरण का प्रोजेक्ट 21 जनवरी 2010 को रेलवे मंत्रालय ने मंजूर किया था। साल 2012-13 में 215 करोड़ का बजट मंजूर हुआ। साल 2015 में भाजपा सरकार ने गति दी और अब प्रोजेक्ट जींद तक पूरा हो गया है। जींद से सोनीपत रेल पर पैसेंजर ट्रेन के लिए सांसद रमेश कौशिक के साथ उन्होंने भी प्रयास किया। यह लाइन साल 2010 में मंजूर हुई। अब भाजपा सरकार ने पूरा करवाया है।
श्रेय लेने की जल्दी
रेलमंत्री
सांसद दीपेंद्र ने कहा कि यूपीए के कार्यकाल में रोहतक-गोहाना रेलवे लाइन पर रेलवे बाईपास मंजूर हुआ था। तब के रेलमंत्री ने इसका शिलान्यास भी किया था। भाजपा सरकार ने इसे बदलकर ऐलिवेटेड ट्रैक बना दिया। वीडियो कांफ्रेंसिंग से रेलमंत्री ने शिलान्यास कर दिया। इसलिए वह शिलान्यास वाले कार्यक्रम में नहीं आए। सांसद ने यह कहकर महम के कार्यक्रम में जाने से इनकार कर दिया कि सरकार की ओर से स्थानीय विधायक आनंद सिंह दांगी को नहीं बुलाया गया है। जबकि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में उनके प्रयासों से निंदाना की पीएससी का शिलान्यास हुआ था। उन्होंने कहा कि राजनीति में अलग-अलग विचारधारा हो सकती है, लेकिन आपस में दुश्मन नहीं हो सकते।
कैप्टन का दीपेंद्र को जवाब
वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु
वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने सांसद दीपेंद्र हुड्डा के सवालों का जवाब दिया। कैप्टन ने कहा कि बाईपास बनने से किसानों की उपजाऊ जमीन प्रभावित हो रही थी। दूसरे, इस प्रोजेक्ट में लागत भी ज्यादा आ रही थी। इसलिए प्रोजेक्ट को बदला गया। ऐलिवेटेड ट्रैक बनने से बजरंग भवन और शीला बाईपास वाले फाटकों पर ओवरब्रिज बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे पैसे की बचत होगी और किसानों की खेती योग्य जमीन भी बच जाएगी।