शहर के 77 शराब ठेकों में से मंगलवार को महज 53 ठेकों के लिए ही टेंडर भरे गए। पहली बार ठेकों की नीलामी में इतने कम आवेदन दर्ज किए गए। शराबबंदी के कारण इस बार ठेकों की नीलामी में शराब कारोबारियों का रुझान कम देखने को मिला। अस्सिटेंट एक्साइज एंड कमिश्नर रविंदर कौशिक ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया के अंतिम दिन देर शाम तक 53 ठेकों के लिए कुल 80 आवेदन दर्ज किए गए। 77 में से 24 ठेकों के लिए एक भी आवेदन नहीं आए।
विभाग के अधिकारियों की मानें तो बचे हुए ठेकों के लिए टेंडर प्रक्रिया दोबारा जारी की जा सकती है। कौशिक ने बताया कि इस बार टेंडर प्रक्रिया में कई नए कारोबारी ही दिखाई पड़े। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से आहत कई कारोबारी आवेदन करने ही नहीं पहुुंचे। लेकिन नए कारोबारियों ने इसका जमकर फायदा उठाया। अधिकारियों का कहना है कि कारोबारी 17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे है।
इसके बाद ही बचे हुए इन 24 शराब के ठेकों की नीलामी सफल हो सकेगी। कौशिक ने बताया कि 5 अप्रैल को टैगोर थिएटर में सुबह 10 बजे ठेकों की अलॉटमेंट होगी। सफल बिडर्स को कुल बोली राशि की 40 प्रतिशत राशि 7 दिनों के अंदर प्रशासन को जमा करवानी होगी। इस बार 99 के बजाए 77 ठेके अलॉट होंगे। मध्य और दक्षिण मार्ग पर बने शराब के ठेके बंद हो गए हैं।
77 ठेकों का 202 करोड़ रखा गया है रिजर्व प्राइज
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वित्त वर्ष 2017-18 की एक्साइज पॉलिसी के तहत 77 ठेकों का रिजर्व प्राइज 202.55 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। जो पिछले साल से करीब 25 करोड़ रुपये अधिक है। कोटा भी पिछले साल से 7.5 प्रूफ लीटर अधिक रखा गया है। इंडियन मेड फोरन लिकर (आईएमएफएल) का 74.25 लाख प्रूफ लीटर कोटा होगा। जबकि देसी शराब का 8.25 लाख प्रूफ लीटर रहेगा। दोनों का मिलाकर कोटा 82.50 लाख प्रूफ लीटर रहेगा। ठेके कम होने से रेवेन्यू का नुकसान न हो इसलिए शराब के रेट 15 प्रतिशत तक बढ़ेंगे।
17 अप्रैल को होनी है सुनवाई
चंडीगढ़ प्रशासन की नजर अब 17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर है। चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर की मुख्य सड़कों के स्टेट हाईवे के स्टेट्स को डिनोटिफाई कर दिया है। प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ हरमन सिद्घू ने याचिका दायर की है। वहीं, प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की मानें तो 17 अप्रैल को सुनवाई में होटल व रेस्तरां मालिकों को सुप्रीमकोर्ट से रियायत मिल सकती है।
होटल मालिक कोर्ट जाने की तैयारी में
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होटल एंड रेस्तरां एसोसिएशन चंडीगढ़ के प्रधान अरविंदर पाल सिंह ने कहा कि जब प्रशासन शहर के सभी स्टेट हाईवे को लेकर डिनोटिफिकेशन कर चुका है। तो मध्य मार्ग को स्टेट हाईवे घोषित कर यहां स्थित होटल, रेस्तरां व डिस्कोथेक में शराबबंदी का फैसला क्यों लागू किया गया। होटल मालिकों ने नेशनल हाईवे को लेकर भी सवाल उठाए हैं। होटल मालिकों का कहना है कि नेशनल हाईवे ट्रिब्यून चौक से सेक्टर 47 से होकर गुजरता है। ऐसे में सेक्टर 34 व 35 को जानी वाली सड़कों को नेशनल हाईवे घोषित कर होटलों में शराबबंदी का फरमान लागू कर दिया है।