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'मैं जब जिंदगी से जंग लड़ती रही, पति देश के लिए पाकिस्तान से लड़ते रहे'

Thu, 01 Dec 2016 12:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक

सार

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दीपा मलिक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दीपा मलिक जब बीमारी में जिंदगी से जंग लड़ रही थी, उसी समय उनके पति कर्नल बिक्रम सिंह देश के लिए कारगिल की जंग में पाकिस्तान से लड़ते रहे। सेना के जवानों में देश रक्षा के लिए कैसा जज्बा व साहस होता है, यह रियो पैरालंपिक में रजत पदक जीतने वाली देश की पहली महिला शॉटपुट खिलाड़ी दीपा मलिक ने बयां किया। 
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दीपा मलिक जब बीमारी में जिंदगी से जंग लड़ रही थी, उसी समय उनके पति कर्नल बिक्रम सिंह देश के लिए कारगिल की जंग में पाकिस्तान से लड़ते रहे। दीपा का जिस अस्पताल में इलाज चल रहा था, वहां कारगिल युद्ध में घायल जवान रोजाना काफी आते थे।

जिनको देखकर काफी दुख होता था, लेकिन यह गर्व रहता था कि देश की रक्षा के उनके पति व अन्य जवान सीमा पर साहस दिखा रहे हैं। सोनीपत के भैंसवाल गांव की दीपा मलिक बुधवार को रोहतक में सर्व खाप पंचायत द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में बतौर मुख्यातिथि पहुंची थीं। 
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दीपा ने बचपन से अभी तक की जिंदगी सैनिक परिवारों में बिताई

दीपा मलिक - फोटो : अमर उजाला
दीपा ने बचपन से अभी तक की जिंदगी सैनिक परिवारों में बिताई है। उनके पिता बीके नागपाल सेना में कर्नल रहे तो ससुर लेफ्टिनेंट जनरल रहे और उनके पति कर्नल बिक्रम सिंह देश सेवा कर रहे हैं।

सैनिक परिवारों से जुड़ी दीपा मलिक बताती हैं कि जब उन्होंने रियो पैरालंपिक में रजत पदक जीता तो वह ऐसी पहली महिला बन गईं, जिसने पैरालंपिक में देश के लिए रजत पदक जीता हो। 

उस समय काफी गर्व महसूस किया था, लेकिन ऐसा ही गर्व वह सैनिक परिवार में होने के कारण रोजाना भी महसूस करती हैं। क्योंकि सैनिकों के कारण ही हर कोई आराम से घर में सोता है और वह अपनी जान पर खेलकर देश की रक्षा करते हैं। वह देश की खातिर अपने परिवार तक को पीछे छोड़ देते हैं। इसलिए सैनिकों का हर किसी को सम्मान करना चाहिए।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के साथ बेटी खिलाओ का नारा देंगी दीपा

दीपा मलिक - फोटो : getty
दीपा मलिक कहती हैं कि जब वह पैरालंपिक में हिस्सा लेने के लिए रियो गई तो काफी शांति से गए। लेकिन जब मेडल जीतकर वहां से लौटे तो जिस तरह का सम्मान दिया गया, उसके बारे में कभी सोचा भी नहीं था।

दीपा मलिक ने हरियाणा की खेल नीति को काफी बेहतर बताया, जिससे खिलाड़ियों का मनोबल हमेशा बढ़ता है। जिससे उनको सरकारी नौकरी मिली और प्रोत्साहन भी किया गया। 

इस कारण ही वे प्रैक्टिस करती रहीं और रियो में मेडल जीता। उन्होंने कहा कि वह सरकार के नारे बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के साथ बेटी को खिलाओ भी जोड़ेंगी। उनका मानना है कि पैरा में सबसे ज्यादा पोलियोग्रस्त खिलाड़ी आते हैं, जिनको प्रोत्साहन करने की सबसे ज्यादा जरूरत है। 

सरकार का दीपा से वादा, फरीदाबाद में पैरा खिलाड़ियों के लिए बनेगा स्टेडियम
दीपा मलिक के अनुसार उनकी सरकार से पैरा खिलाड़ियों के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम बनाने की बात हुई थी। जिसको फरीदाबाद में बनाने के लिए कहा गया है और सरकार वहां जल्द ही स्टेडियम बनाएगी। उसके बाद पैरा खिलाड़ी बेहतर सुविधा मिलने पर अच्छा प्रदर्शन कर सकेंगे और पैरालंपिक में ओर भी ज्यादा मेडल लेकर आएंगे। 
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खाप भी कर रही बेटियों का सहयोग : दीपा 

दीपा मलिक - फोटो : getty
खाप पंचायतें बेटियों के उत्थान के लिए सर्वोत्तम प्रयास कर रही हैं। यह खाप पंचायतों की ही महिमा है कि पूरे उत्तर भारत में बेटियां चैन की सांस ले रही हैं। दीपा ने कहा कि बेटियों के लिए हर क्षेत्र में रास्ते खुले हैं।

उन्हें स्वयं की इच्छाशक्ति को जाग्रत करके अपने मुकाम को पाना होगा। मेहनत कर वे किसी भी मंजिल को पा सकती हैं। उन्होंने बताया कि कई साल पहले जब वे लकवे के कारण अपंगता की शिकार हो गईं। तब उनकी सास ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

जिसके बाद उन्होंने कभी पलट के नहीं देखा। सर्व खाप पंचायत संयोजक महेंद्र सिंह नान्दल ने कहा कि आज बेटियों ने हमारा मान बढ़ाया है। उनका समान करना हम सबका दायित्व है।

 मलिक खाप के प्रधान बलजीत सिंह मलिक की अगुवाई में सभी खाप प्रधानों और प्रतिनिधियों ने उन्हें स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। नित्यानंद पब्लिक स्कूल की प्रबंध निदेशक सत्या मलिक ने दीपा मलिक को शाल भेंट की। 

सम्मान समारोह के बाद दीपा मलिक सैनिक परिवार की होने के नाते हरियाणा पूर्व सैनिक संघ भवन सेक्टर-4 रोहतक पहुंची। पूर्व सैनिक संघ प्रधान कर्नल आरएस. मलिक के नेतृत्व में उनका स्वागत हुआ। 
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