-प्रदेशभर में कर्मचारियों ने जलाई आदेशों की प्रतियां, एनएचएम निदेशक ने आदेश जारी किया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। दिवाली से पहले 15 हजार नेशनल स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारियों के सेवा नियमों को फ्रीज करने के मामले में हरियाणा सरकार बैकफुट पर आ गई है। त्योहारी सीजन और कर्मचारियों के आक्रोश को देखते हुए 24 घंटे से पहले ही सरकार ने इस फैसले को वापस ले लिया है। इस संबंध में एनएचएम के निदेशक ने सभी सिविल सर्जन को पत्र भेजकर जानकारी दी है।
29 अक्टूबर को मिशन निदेशक की ओर से कर्मचारियों के सेवा नियम फ्री करने के आदेश जारी किए गए थे। वित्त विभाग द्वारा जताई गई आपत्ति को इसका आधार बनाया गया था। सेवा नियमों के फ्रीज होने के बाद कर्मचारियों को ग्रेड पे के हिसाब से वेतन नहीं मिल पाएगा, बल्कि उनको फिक्स वेतन देने की योजना थी। विभाग ने एक सप्ताह में वेतन तय करने को लेकर भी सुझाव मांगे थे। इधर, एनएचएम कर्मचारियों ने आदेशों के विरोध में बुधवार को प्रदेशभर में रोष प्रदर्शन कर आदेशों की प्रतियां जलाईं। कर्मचारियों द्वारा काली दिवाली मनाने के एलान के बाद सरकार ने दोपहर बाद फैसला वापस ले लिया। एनएचएम के निदेशक ने सभी सिविल सर्जन को भेजे पत्र में पहले दिए गए आदेशों को वापस लेने के लिए कहा है।
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सरकार दोबारा ऐसा करेगी तो फिर विरोध होगा : जितेंद्र वत्स
दरअसल, 2018 से एनएचएम कर्मचारियों को ग्रेड पे के हिसाब से वेतन मिल रहा है। अब एनएचएम की ओर से कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग के हिसाब से वेतन देने का प्रस्ताव भेजा गया था। वित्त विभाग ने इस पर आपत्ति जताई है कि जब कर्मचारियों के लिए सेवा नियम (बाईलाज) बनाए गए तो वित्त विभाग की अनुमति नहीं ली गई थी, इसलिए बाईलाज को फ्रीज करने के लिए कहा है। पदाधिकारियों ने आशंका जताई कि सरकार दोबारा से आदेश जारी कर सकती है। स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री जितेंद्र वत्स, राज्य उपाध्यक्ष जगत बिसला ने कहा कि कर्मचारी एकजुट हैं और किसी भी सूरत में ऐसा नहीं होने देंगे। अगर सरकार दोबारा से ऐसा करेगी तो उसका भी खुलकर विरोध किया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री से मिले कर्मचारी, लंबित मांगें पूरी करने को सौंपा पत्र
चंडीगढ़। स्वास्थ्य कर्मचारी संघ हरियाणा का प्रतिनिधिमंडल स्वास्थ्य मंत्री आरती राव से मिला। कर्मचारियों ने लंबित मांगों को पूरा कराने के लिए ज्ञापन सौंपा। मंत्री ने आश्वस्त किया कि एनएचएम कर्मचारियों के साथ कोई भी खिलवाड़ नहीं होने दिया जायेगा। राज्य कमेटी के सदस्य हरकेश ने कहा कि एनएचएम कर्मचारी भी सातवें वेतन आयोग को लागू करने के लिए बार-बार आंदोलन कर रहे थे और 2 नवंबर 2021 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा सैद्धान्तिक स्वीकृति प्रदान की गई थी, जो कि आज तक लंबित है।