चंडीगढ़। शहर में दिवाली पर पटाखों की बिक्री और आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगेगा या नहीं, इस पर फैसला वीरवार को होगा। पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने वीरवार को ट्राइसिटी के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक बुलाई है, जिसमें पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध का फैसला लिया जाएगा।
कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए ही चंडीगढ़ प्रशासन अन्य राज्यों की तरह शहर में पटाखा जलाने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है। इस बारे में मंगलवार को डीसी मनदीप सिंह बराड़ और एडीसी नाजुक कुमार की तरफ से संकेत भी दिए गए थे। मंगलवार को पटाखा विक्रेताओं को लाइसेंस देने के बाद कहा गया था कि अभी वह पटाखों का स्टॉक न खरीदें। इससे पटाखा व्यापारी भी असमंजस की स्थिति में हैं कि वह क्या करें, क्योंकि 96 विक्रेताओं को लाइसेंस मिल चुका है। अब डीसी ऑफिस की तरफ से सभी पटाखा विक्रेताओं को शुक्रवार तक इंतजार करने को कहा गया है। नाम न छापने की शर्त पर एक पटाखा विक्रेता ने बताया कि उन्हें कहा गया है कि शुक्रवार तक का इंतजार करें, उसके बाद ही उन्हें बताया जाएगा कि क्या करना है।
कई राज्य पटाखा खरीदने, बेचने और जलाने पर लगा चुके हैं प्रतिबंध
राजस्थान, उत्तराखंड, ओडिशा समेत कई राज्य सरकारों ने कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते हुए दिवाली पर पटाखा खरीदने, बेचने व जलाने पर पाबंदी लगा दी है। यह प्रतिबंध कुछ राज्यों में 30 नवंबर तो कुछ में 31 दिसंबर तक लगाया है। इसके अलावा कई राज्य पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं। इन राज्यों की सरकार ने लोगों से कहा कि वह मिट्टी के दीये, मोमबत्ती और रंगीन लाइट जलाकर पर्व मनाएं। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने भी सोमवार को इस बारे में संकेत दिए थे। समीक्षा बैठक में उन्होंने शहरवासियों से दीवाली के मौके पर पटाखे नहीं जलाने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि पटाखों से निकलने वाला जहरीला धुआं फेफड़े को काफी नुकसान पहुंचाता है। इसके अलावा शहर में कोरोना वायरस के संक्रमण को फिर फैलाने में सहायक हो सकता है।