लोक सभा चुनाव में हुई करारी हार के बाद पंजाब प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी फिर से तेज हो गई है। कैप्टन अमरिंदर सिंह गुट प्रदेश प्रधान प्रताप सिंह बाजवा पर इस्तीफे का दबाव बढ़ा दिया है।
हालांकि बाजवा का भविष्य आज दिल्ली में होने वाली कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की मीटिंग पर टिका है। लोकसभा चुनाव केबाद होने जा रही कार्यसमिति की इस पहली मीटिंग को काफी अहम माना जा रहा है।
लंबे समय से चल रही कैप्टन-बाजवा में जंग
प्रदेश कांग्रेस प्रधान पर कब्जे को लेकर कैप्टन और बाजवा के बीच लंबे समय से जंग चल रही है। 2012 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद आलाकमान ने कैप्टन को हटाकर बाजवा को प्रधान बना दिया था। अब वही स्थिति बाजवा के सामने आ गई है।
पिछली बार कैप्टन की अगुवाई में कांग्रेस 13 में से आठ सीटें जीती थी। इस बार बाजवा की प्रधानी में पार्टी सिर्फ तीन सीट जीत सकी है। बाजवा खुद 1.30 लाख मतों के बड़े अंतर से भाजपा के विनोद खन्ना से हार गए हैं। कैप्टन अमरिंदर ने भाजपा के राष्ट्रीय नेता अरुण जेटली को एक लाख से ज्यादा वोटों से मात दी है।
नतीजों के एक दिन बाद ही कैप्टन ग्रुप ने बाजवा के खिलाफ किलेबंदी शुरु कर दी थी। सबसे पहले विधायक राणा गुरमीत सोढी ने बाजवा केइस्तीफेकी मांग की। अगले ही दिन केवल ढिल्लों समेत कई विधायकों और नेताओं ने यह मांग दोहराई। साथ ही यह भी कहा कि कैप्टन अमरिंदर को प्रधान बनाया जाना चाहिए।
बाजवा की नजरें सीडब्ल्यूसी पर
अब बाजवा और कैप्टन, दोनों ही गुटों की नजरें सीडब्ल्यूसी पर टिकी हैं। कई राज्यों में पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है। सबसे पहले निगाहें इस पर हैं कि क्या सोनिया गांधी और राहुल गांधी इस्तीफा देंगे।
उसके बाद क्या तमाम राज्यों के सीएम व प्रदेश प्रधान से लेकर दूसरे राष्ट्रीय नेता भी इस्तीफा देते हैं। अगर कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर पर इस्तीफों का दौरा न शुरु हुआ तो बाजवा को भी राहत मिल सकती है। पर अगर दूसरे नेताओं ने इस्तीफा दिया तो बाजवा को भी इसी परंपरा पर चलना होगा।