पसंद के साथी के साथ रहना सांविधानिक अधिकार है, यह कहते हुए सहमति संबंध में रहने वाले जोड़े ने सुरक्षा से इनकार के सिंगल बेंच के फैसले को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की खंडपीठ में चुनौती दी है।
हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने कहा था कि युवक पहले से शादीशुदा है और 19 साल की लड़की के साथ सहमति संबंध में रहकर उसका जीवन बर्बाद कर रहा है। जीवनसाथी से बिना तलाक लिए रहना कामुक और व्यभिचारी जीवन जीना है। इस प्रकार के रिश्ते को सहमति संबंध भी नहीं कह सकते। इस प्रकार जोड़े के तौर पर रहने पर सुरक्षा का आदेश नहीं दिया जा सकता। व्यक्तिगत तौर पर सुरक्षा के लिए जोड़ा पुलिस से गुहार लगा सकता है। इन टिप्पणियों के साथ ही सुरक्षा की मांग को लेकर दाखिल याचिका को सिरे से खारिज कर दिया था। अब खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
यह है मामला
कैथल निवासी प्रेमी जोड़े ने सहमति संबंध में रहने के लिए सिंगल बेंच के समक्ष सुरक्षा की गुहार लगाई थी। युवक का पत्नी से 2014 से विवाद चल रहा है और दोनों अलग रह रहे हैं। दोनों की कोई संतान नहीं है। युवक और सहमति संबंध में रहने वाली लड़की ने सुरक्षा की कैथल पुलिस से गुहार लगाई थी, लेकिन सुरक्षा नहीं मिली। सिंगल बेंच ने भी सुरक्षा की मांग को सिरे से खारिज कर दिया था।