स्कूल के अध्यापकों ने बताया कि स्कूल के एक कमरे का 5 वर्ष पहले व लाइब्रेरी का 4 वर्ष पहले छत का मलवा गिरने के कारण इन्हें बंद कर दिया गया था। अध्यापकों ने बताया कि उक्त 10वीं का कमरा बेशक बहुत पुराना था, लेकिन इसकी हालत ठीक होने के कारण यहां कक्षा लगाई जा रही थी। घटना की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है।
मौत के साए में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर विद्यार्थी
पंजाब सरकार सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने के अनेक दावे करती आ रही है, लेकिन हकीकत ये है कि आज भी सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी खस्ताहाल इमारतों में मौत के साए में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। बता दें कि दप्पर के इस सरकारी स्कूल में बारिश के दिनों में स्कूल कैंपस में पानी की निकासी न होने के कारण पानी नए बने कमरों में जमा हो जाता है, जिस कारण विद्यार्थियों व स्टाफ को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अध्यापकों द्वारा समस्याओं को कई बार उच्चाधिकारियों को सूचित करने के बाद भी इनका आज तक हल नहीं निकल सका।